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दोहरे हत्याकांड के वक्त दूसरे कमरे में रखे थे 63 लाख रूपए

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बदरपुर दोहरे हत्याकांड में जिस जगह वारदात हुई उसी दफ्तर के दूसरे कमरे में 63 लाख रुपये रखे हुए थे। आशंका है कि इन रुपयों के चक्कर में ही लूटपाट के लिए वारदात को अंजाम दिया गया। लेकिन, बदमाशों के हाथ रकम नहीं लग सकी। वह एक अन्य बैग लेकर मौके से फरार हो गए। शुरूआती जांच में हत्याकांड का मुख्य कारण लूटपाट लग रहा है। पुलिस अन्य दृष्टिकोण से भी मामले की छानबीन कर रही है।
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दोहरे हत्याकांड के वक्त दूसरे कमरे में रखे थे 63 लाख रूपए

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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एमसीडी के लिए टोल इकट्ठा करने वाली कंपनी के दफ्तर में रोजाना 20 से 25 लाख रुपये कैश आता है। रविवार जिस समय वारदात हुई, उस समय दफ्तर के एक कमरे में 63 लाख रुपये रखे हुए थे। पुलिस का मानना है कि बदमाशों को लगा होगा कि कैशियर के रूम से रकम मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि फरार दोनों युवकों ने दफ्तर की अच्छी तरह से रेकी कर वारदात को अंजाम दिया।
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दोहरे हत्याकांड के वक्त दूसरे कमरे में रखे थे 63 लाख रूपए

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टोल टैक्स कंपनी के दफ्तर के सामने राकेश गौतम के मकान में दोनों युवक पिछले तीन-चार माह से रह रहे थे। तीन हजार रुपये महीने पर दूसरी मंजिल का कमरा किराये पर लिया था। कमरा लेते समय राकेश को दोनों ने खुद को गुड़गांव का निवासी बताया था। साथ ही बदरपुर स्थित एक कोचिंग में एसआई परीक्षा की तैयारी की बात कही थी। दीपक ने फोन पर अपने पिता को हरियाणा पुलिस का सिपाही बताकर बात भी कराई थी। पुलिस को राकेश ने बताया कि दीपक ने पहचान के लिए अपने डीएल की कॉपी उसे दी थी। उसने किराएदार के वेरिफिकेशन का फॉर्म तो भर लिया था, लेकिन उसे जमा नहीं करवाया था।

दोहरे हत्याकांड के वक्त दूसरे कमरे में रखे थे 63 लाख रूपए

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स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले दिनों दीपक व विशाल छेड़छाड़ के आरोप में पकड़े गए थे। स्थानीय लोगों ने दोनों की पिटाई भी की थी। दोनों ने मोहल्ले वालों के हाथ-पैर जोड़कर माफी मांग ली थी। इसी वजह से दोनों की  पुलिस से शिकायत नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना था कि दोनों को कभी क्लास करने नहीं जाते देखा गया। अक्सर दोनों अपने कमरे की बालकनी में खड़े रहकर टोल दफ्तर में झांकते रहते थे। जिस निजी कंपनी के कर्मचारियों के साथ वारदात हुई वह दिल्ली के सभी 124 टोल टैक्स प्लाजा पर कलेक्शन का काम करती है।
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दोहरे हत्याकांड के वक्त दूसरे कमरे में रखे थे 63 लाख रूपए

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बदरपुर टोल के दफ्तर पर रोजाना 20 से 25 लाख रुपये टोल जमा होता है, लेकिन इसके बाद भी यहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया है। इसकी वजह से पुलिस को बदमाश की सही संख्या भी नहीं पता चल सकी है। तीन दिन पहले टोल पर कर्मचारियों का मारुति वैन सवार कुछ लोकल लड़कों से झगड़ा हो गया था। दरअसल, वैन सवार चार-पांच युवक गलती से टोल लेन में आ गए थे। इसी बात पर उनकी कैशियर मनमोहन से बहस हो गई थी। लड़कों ने खुद को लोकल बताते हुए सभी को देख लेने की धमकी दी थी। कुछ लोगों का कहना था कि वारदात को इन लोगों ने ही अंजाम दिया। पुलिस इस दृष्टिकोण से भी मामले की छानबीन कर रही है।
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