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नोटबंदी के 50वें दिन की इस सच्चाई को देख आप भी चौंक सकते हैं

Sat, 31 Dec 2016 09:35 AM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री से लोगों को बड़ी उम्मीद, कहा पचास दिन का समय मांगा, धैर्य दिखाया, अब भ्रष्टाचार व कालेधन से आम लोगों को मिले राहत 
एटीएम पर लंबी लाइन खत्म और बैंकों में खाते से निकलने लगा कैश 
- नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने के बाद अधिकांश एटीएम व बैंकों में राहत, पांच सौ रुपये मिलने से लोग खुश 
- प्रधानमंत्री से लोगों को बड़ी उम्मीद, कहा हमने निभाया, अब भ्रष्टाचार व कालेधन से आम लोगों को मिले राहत
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note - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के पचास दिन बीतने और पुराने नोट बदलने की समय सीमा का आखिरी दिन होने के चलते शुक्रवार को राजधानी के अधिकांश एटीएम में कैश था लेकिन कतारें गायब थीं। अधिकांश बैंकों से चेक देने पर ग्राहकों को 24 हजार रुपये तक का कैश भी मिल रहा था। वहीं, कई सरकारी व निजी बैंकों ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए अन्य ब्रांच के ग्राहकों को भी चेक से कैश निकालने की अनुमति देनी शुरू कर दी है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में जाकर अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा और फोटोग्राफर विवेक निगम ने बैंकों और एटीएम का जायजा लेते हुए ग्राहकों से भी बात की।
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- फोटो : अमर उजाला
चेक से अन्य शाखाओं के ग्राहकों को भी 24 हजार का मिला कैश 
समय  सुबह 11 बजे : वसुंधरा एंक्लेव 
एचडीएफसी बैंक और एटीएम दोनों से ग्राहक खुश होकर निकल रहे थे। क्योंकि दोनों जगह उन्हें कैश निकल रहा था। यहां पर एटीएम से पांच सौ और दो हजार रुपये के नोट मिल रहे थे। लोग एक से अधिक कार्ड से यहां कैश निकालने में बिजी थे। बैंक मैनेजर स्वयं ग्राहकों को दिक्कत होने पर जानकारी मांगते दिखे। यहां पर चेक से कैश निकाला जा रहा था। लोगों ने उनके पास चेक बुक नहीं थी तो पेन कार्ड व आधार कार्ड की कॉपी का अकाउंट से मिलान करके उन्हें 24 हजार रुपये का कैश दे दिया गया। इसी के साथ केनरा बैंक में भी ग्राहकों को कैश मिल रहा था। हालंकि पंद्रह से बीस मिनट का इंतजार करना पड़ा। 

पचास दिनों में एक दिन भी एटीएम के शटर नहीं खुले
मयूर विहार फेज थ्री : समय सुबह दस बजे, डीडीए मिक्स हाउंसिंग सोसायटी
डीडीए हाउंसिग सोसायटी के मध्य स्थित आंध्र बैंक और यूनियन बैंक की बड़ी शाखाएं हैं। हालांकि नोटबंदी के साथ ही दोनों बैंकों के एटीएम के शटर डाउन हैं, जोकि अभी तक नहीं खुले हैं। हालांकि दोनों बैंकों में अपनी शाखा के ग्राहकों को ही कैश दिया जा रहा था। यदि इन दोनों बैंकों की किसी अन्य शाखा का ग्राहक चेक बुक लेकर आ रहा था तो उसे कैश देने से मना कर दिया जाता  था। लोगों का आक्रोश है कि करीब आठ से दस हजार सोसायटी वाले इन बैंकों के एटीएम में एक दिन भी कैश नहीं मिलना, कई सवाल खड़े करता है।
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- फोटो : अमर उजाला
एटीएम के बाहर नहीं दिखी लाइन, पांच सौ के नोट मिलने से ग्राहक खुश  
मयूर विहार फेज दो : समय दुपहर डेढ़ बजे
डीडीए फ्लैट, ईस्ट विनोद नगर के बीचों बीच स्थित मयूर विहार फेज दो की मार्केट में कई राष्ट्रीय बैंक और कोटक महिंद्रा, आईसीआईसीआई, एसबीआई, एचडीएफसी समेत आधा दर्जन एटीएम भी हैं। नोटबंदी के दौरान एटीएम के बाहर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग कैश निकालने के लिए घंटों इंतजार करते थे। हालांकि शुक्रवार को नजारा अलग था। लंबी लाइनों की बजाय  यहां एटीएम के बाहर लाइन की बजाय तीन से चार लोग ही खड़े थे। लोग सीधे एटीएम में जाते और पांच सौ या दो हजार रुपये का नोट निकालकर फटाफट निकल जाते। 

एटीएम में कैश पर ग्राहक नदारद, बैंकों से निकल रहा था कैश 
गोल मार्केट : समय शाम चार बजे 
कनॉट प्लेस स्थित गोल मार्केट एक व्यस्त इलाका है, जहां एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, यस बैंक, केनरा, एसबीआई आदि बैंक समेत एटीएम एक ही लाइन में हैं। यहां पर सभी बैकों समेत एटीएम में कैश उपलब्ध था लेकिन भीड़ एसबीआई में ही देखने को मिली। एसबीआई एटीएम की लाइन में लगे हाशिम ने बताया कि उन्होंने पता ही नहीं किया कि सभी बैंकों के एटीएम में कैश मिल रहा है। यहां पांच-सात लोग खड़े दिखे तो वे भी लाइन में लग गए। जब लोगों को पता चला कि सभी एटीएम से कैश निकल रहा है तो लाइन एकदम से छंट गयी। यस बैंक व एचडीएफसी बैंक एटीएम के बाहर खड़े गार्ड ने कहा लोग पूछते ही नहीं हैं,बस लाइन देखी और एसबीआई के बाहर खड़े हो गए। जबकि हमारे एटीएम में कैश उपलब्ध था।

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- फोटो : अमर उजाला
पांच एटीएम में शटर डाउन, गुलाब के फूल से नोटबंदी पर धैर्य का संदेश 
एसबीआई मुख्यालय : पार्लियामेंट स्ट्रीट, समय  दुपहर एक बजे 
पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की रोड पर एसबीआई का मुख्यालय है। बैंक के अंदर जाने वाला गेट खुला था और ग्राहक आराम से अंदर जाकर कैश निकालकर आ रहे थे। हालांकि इसी मुख्यालय भवन के नीचे एसबीआई के पांच एटीएम हैं, जिसके शटर डाउन थे। लोगों का कहना था कि पचास दिन बीत चुके हैं, लेकिन एटीएम के शटर डाउन देख गुस्सा आता है। ऑफिस में लंच टाइम में ही पैसे निकालने की फुरसत होती है। ऐसे में एटीएम बंद देख गुस्सा आ रहा है। ऐसे ही परेशान ग्राहक ने यहां गुलाब का फूल लगाकर प्रधानमंत्री की नोटबंदी की योजना पर साथ देते हुए अपने धैर्य का संदेश दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
दो हजार प्राथमिकता नहीं, पांच सौ रुपये के लिए लाइन 
पंजाब नेशनल बैंक, पटेल चौक : समय दुपहर सवा दो बजे
संसद और आरबीआई मुख्यालय से चंद कदम दूर पंजाब नेशनल बैंक नोटबंदी में पूरे पचास दिनों तक ग्राहकों का पसंदीदा बैंक रहा है। क्योंकि बैंक प्रबंधन ने एटीएम में कैश खत्म होने ही नहीं दिया। यहां दिन-रात सभी तीन एटीएम में ग्राहकों को पांच सौ व दो हजार रुपये के नोट उपलब्ध होते रहे। इसीलिए यहां दिन-रात लोगों की लंबी लाइन एटीएम समेत बैंक के बाहर दिखती रही। शुक्रवार को एक एटीएम के बाहर लाइन बिल्कुल नहीं थी। जबकि दो अन्य से कैश निकालने के लिए करीब दस लोग लाइन में खड़े थे। पूछने पर पता चला कि एक में दो हजार रुपये निकल रहे हैं, लेकिन वो किसी को नहीं चाहिए। दो अन्य में पांच-पांच सौ रुपये के साथ ढाई हजार मिल रहे हैं, जिसे लेने के लिए थोड़ा इंतजार पसंद है।
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- फोटो : ANI
हमने धैर्य दिखाया अब रिजल्ट दें प्रधानमंत्री
धैर्य के साथ पीएम का दिया साथ अब भ्रष्टाचार पर लगे नकेल 
प्रधानमंत्री ने आम लोगों से नोटबंदी के दौरान दिक्कतों को दूर करने में पचास दिन मांगे थे, जोकि पूरे हुए, अब हम उम्मीद करते हैं कि भ्रष्टाचार व काले दिन पर नकेल लगेगी। हमने धैर्य रखा अब रिजल्ट देने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। क्योंकि हम जैसे आम लोग ही भ्रष्टाचार के चलते सबसे अधिक परेशान हैं। -ममता, गृहिणी।
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- फोटो : अमर उजाला
पचास दिन पूरे और एटीएम में ग्राहक हुए नदारद
काले धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने के साथ राजधानी के अधिकांश एटीएम में कैश उपलब्ध है, लेकिन ग्राहक नदारद। ऐसे में कहा जा सकता है कि कुछ पाने के लिए कुछ परेशानी तो झेलनी पड़ती है। बस अब हम भारत को दोबारा सोने की चिड़िया बनते देखना चाहते हैं। - हाशिम अली, नौकरीपेशा। 

योजना अच्छी थी पर दिक्कत काफी रहीनोटबंदी बहुत अच्छी थी, लेकिन पैसे निकालने के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम की दौड़ और घंटों लाइन में लगकर कैश निकालने की परेशानी बेहद दर्दभरी रही है। हालांकि देश् की जनता ने मोदी का साथ दिया है और उन्हें इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि आम लोगों को भ्रष्टाचार व काले धन से निजात मिले। - कर्मचंद, पर्यटक।
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