पिछले एक हफ्ते से चल रहे कयासों के बीच अंततः गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ को यूपी का सीएम चुन लिया गया। शनिवार को लखनऊ में वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू के नेतृत्व में संसदीय दल की बैठक हुई जिसमें योगी को सीएम के तौर पर चुना गया। पार्टी के इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी के बाहर बल्कि, दल के अंदर भी लोगों को चौंका दिया। सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी इस फैसले के खिलाफ थे। हालांकि, पार्टी ने उन्हें डिप्टी सीएम का पद देकर मनाने की कोशिश की है। इसके बावजूद योगी के चुनाव को पार्टी की छवि के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। ये हैं वो पांच कारण जिनकी वजह से हो रहा है योगी का विरोध...
विज्ञापन
2 of 6
योगी आदित्यनाथ
1- आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद हैं और इससे पहले वह गोरनाथ मंदिर के महंत रह चुके हैं। पूरे प्रदेश में उनकी कट्टर हिंदूवादी नेता की छवि है। माना जा रहा है कि उनके सीएम बनने से प्रदेश में कट्टर हिंदूवाद को बढ़ावा देने का संदेश जा सकता है जिससे पार्टी की विकासवादी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
विज्ञापन
3 of 6
योगी आदित्यनाथ
2- चूंकि ऐसा माना जा रहा है कि यूपी में भाजपा की प्रचंड जीत में सभी धर्मों के लोगों ने पार्टी को वोट किया है ऐसे में योगी की कट्टर छवि से अल्पसंख्यकों के बीच सकारात्मक संदेश नहीं जाएगा।
4 of 6
योगी आदित्यनाथ
3- योगी के सीएम बनने से पार्टी के उन नेताओं को भी धक्का लग सकता है जो अपनी उदार छवि के कारण जाने जाते हैं जिसमें सबसे आगे केशव प्रसाद मौर्य और मनोज सिन्हा जैसे नेताओं का नाम है।
विज्ञापन
5 of 6
योगी आदित्यनाथ
4- यूपी में भाजपा के आने का सबसे बड़ा कारण पूर्व सरकारों की कानून व्यवस्था बनाने में असफलता मानी जाती है। साथ ही इस चुनाव में विकास एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था। ऐसे में अगर योगी को सीएम बनाया जाता है तो विकास की जगह हिंदुत्व को लेकर नई बहस शुरु हो सकती है जिससे भाजपा का सबका साथ सबका विकास वाला नारा पीछे रह सकता है।