विपक्षी हावी
नेताओं द्वारा आप पार्टी छोड़ने से पार्टी कमजोर होगी और इससे विपक्षी के पास मौका उसे निशाने पर लेने का। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई नेताओं की आपस में नहीं बनती। इससे विपक्ष आप पार्टी पर हावी हो सकता है।
कार्यकताओं का मनोबल टूटता है
बागी नेता कपिल मिश्रा पहले से कहते आ रहे हैं कि आप पार्टी कार्यकताओं की सुनने वाली पार्टी है लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। ऊपर से नेताओं का बारी-बारी से पार्टी को छोड़ना कार्यकताओं के लिए संकट बनता चला जा रहा है। इससे उनका मनोबल टूट रहा है।
तानाशाही का लग रहा है आरोप
आरोप है कि आम आदमी पार्टी से नेताओं के जाने की एक बड़ी वजह ये है कि चंद लोग मिलकर पार्टी के अहम फैसले ले लेते हैं और पार्टी के प्रमुख नेताओं तक से राय नहीं ली जाती। जैसे किस नेता को कहां से चुनाव लड़वाना है, किसे राज्यसभा भेजना है आदि। महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सिर्फ केजरीवाल या कुछ और लोग मिलकर फैसले ले लेते हैं। इससे आम आदमी पार्टी एक तानाशाह का रूप लेते जा रही है। बता दें कि आशुतोष के बाद एक और पत्रकार आशीष खेतान ने भी आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा दे दिया है। खेतान ने पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को 15 अगस्त को ई-मेल से निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा भेजा है।