वहीं, गणेश सिंह के दो बच्चे दिव्यांश और लतिका (लक्की) भी मृतकों में शामिल थे। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए उन्होंने मदकोट में किराए पर कमरा लिया था और वहीं पर दोनों बच्चों के साथ रहते थे। कोरोना के कारण स्कूल बंद हुआ तो दोनों बच्चे अपने माता-पिता के साथ गांव टांगा आ गए थे। वे कोरोना से तो बचे, लेकिन मौत से नहीं बच पाए।