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इस मंदिर में होती है 'महाभारत के खलनायकों' की पूजा, रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

Sat, 03 Jun 2017 02:45 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, देहरादून
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आपने दुन‌ियाभर में देवी-देवताओं के अद्भुत मंद‌िरों के बारे में तो जरूर सुना होगा। ऐसे ही कई मंद‌िरों में आप गए भी होंगे और पूजा भी जरूर की होगी। लेक‌िन आज हम आपको एक ऐसे मंद‌िर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर महाभारत काल के खलनायकों की पूजा की जाती है। 
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आपको सुनने में अजीब जरूर लगे लेक‌िन यह सच है।  जी हां, यह मंद‌िर देवभूम‌ि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में है। सद‌ियों पहले बने इस मंद‌िर से यहां के लोगों की आस्था जुड़ी है। यहां प्राचीन काल में बना दुर्योधन का एक मंद‌िर है। 
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हैरानी की बात यह है क‌ि यहां दुर्योधन को देवता की तरह पूजा जाता है और दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। हालांक‌ि कहा जाता है क‌ि अब इस मंद‌िर को श‌िव मंद‌िर में बदल द‌िया गया है। लेक‌िन यहां दुर्योधन की सोने की कुल्हाड़ी है ज‌िसकी लोग आज भी पूजा करते हैं।

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Duryodhana temple
कहते हैं कि भब्रूवाहन नाम का राक्षस महाभारत युद्ध में भाग लेना चाहता था, लेकिन कृष्ण ने उसे युद्ध से वंचित कर दिया। वहीं युद्घ में उससे अर्जुन को हानि होते देख श्री कृष्‍ण ने उसका सर काट द‌िया। 
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Duryodhana temple
इसके बाद उसके सिर को एक पेड़ पर टांग दिया गया जहां से उसने पूरा युद्घ देखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब-जब भी महाभारत के युद्ध में कौरवों की रणनीति विफल होती या उन्हें हार का मुंह देखना पड़ता, तब भुब्रूवाहन जोर-जोर से चिल्लाकर उनसे रणनीति बदलने के लिए कहता था।
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दुर्योधन और कर्ण दोनों भुब्रूवाहन के बड़े प्रशंसक थे। यहां के स्थानीय लोग अब भी उसकी वीरता को सलाम करते हैं और उसकी प्रशंसा में गीत गाए जाते हैं। यहां के लोगों ने भुब्रूवाहन के मित्र कर्ण और दुर्योधन के मंदिर बनाए हैं। दुर्योधन का मंदिर सौर गांव में, जबकि कर्ण का मंदिर सारनौल गांव में हे। इतना ही नहीं ये दोनों इस इलाके के क्षेत्रपाल भी बन गए। 
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