नौ माह की कड़ी मेहनत के बाद 146 प्रशिक्षु महिला आरक्षी उत्तराखंड पुलिस की मुख्य धारा से जुड़़ गई हैं। पासिंग आउट परेड में अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने रिक्रूट आरक्षियों को ईमानदारी और कर्तव्यों
का सफलता पूर्वक निर्वहन करने की शपथ दिलाई।
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- फोटो : amar ujala
एक साल तक इन महिला कांस्टेबलों को विभिन्न थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के बाद तैनाती दी जाएगी। सोमवार सुबह पुलिस लाइन मैदान चंबा में बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच बैंड की धुनों के साथ पासिंग आउट परेड शुरू हुई। इस दौरान 146 प्रशिक्षु पूरे गणवेश में सबके आकर्षण के केंद्र रहे।
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परेड देखने के लिए मैदान में कई लोग जुटे। मुख्य अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि पुलिस जवानों का जीवन का उद्देश्य लोगों की
सुरक्षा और असहायों की मदद करना होना चाहिए। एसएसपी विमला गुंज्याल ने कहा कि पुलिस महकमे में अनुशासन का सबसे अहम स्थान है। इस मौके पर डीएम सोनिका, सहायक सेना नायक जेपी गोस्वामी, आरआई शिवराज राणा, सीओ हीरा सिंह रौथाण, कोतवाली प्रभारी सुंदरम शर्मा, थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह चौहान, एलआईयू निरीक्षक एसडी नौटियाल, सुखपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
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किस जिले को कितने आरक्षी मिले
टिहरी में 19, पौड़ी 29, रुद्रप्रयाग 15, अल्मोड़ा एक, देहरादून 10, चमोली 25, हरिद्वार 13, उत्तरकाशी 34
रीना रही ओवर आल बेस्ट
प्रशिक्षण के दौरान वाह्य और अंत: प्रशिक्षण में रीना सर्वोच्च अंक प्राप्त कर बेस्ट रिक्रू्ट मेंट का खिताब हासिल
किया। उसने कुल 1100 में से 807 अंक प्राप्त किए।
6 परेड में विमला रही अव्वल
दीक्षांत परेड में विमला, अर्चना और दीपिका ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे, जबकि रितिका ने वाह्य
प्रशिक्षण, बबली ने क्राफ्ट में पुरस्कार हासिल किया।
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महिला पुलिस कर्मियों की फेहरिस्त में उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य बनने जा रहा है। इस माह तक पुलिस को 908 महिला कांस्टेबल मिलने जा रहे हैं। अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने पत्रकार वार्ता में कहा कि उत्तराखंड में महिला हर क्षेत्र में आगे है। इसे देखते हुए पुलिस में भी महिलाओं की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में पुलिस लाइन चंबा औरअन्य स्थानों में महिला आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। कहा कि पंजाब के बाद अब उत्तराखंड में भी ड्रग्स की समस्या पांव पसारने लगी है।
पुलिस कांस्टेबल बनने के लिए भले ही शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट निर्धारित की गई थी, लेकिन उच्च शिक्षित युवतियों ने भी बड़ी संख्या में पुलिस में सेवाएं देने में पीछे नहीं रही। स्नातक और स्नातकोत्तर के साथ 56 बीएड, दो फार्मेसिस्ट और एक बीटेक प्रशिक्षित युवती ने भी महिला आरक्षी रिक्रू्टमेंट का प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस का अंग बनी। पुलिस के सामने आतंकवाद, माओवाद, अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और मेला प्रबंधन करना चुनौती है। उन्होंने
बताया कि टिहरी बांध की झील में संचालित होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए झील में रिर्पोंटिग पुलिस चौकी खोलने के लिए सरकार से हरी झंडी मिल गई है।