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कौन होगा पीएम मोदी, मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स के 'चमत्कारी' गुरु के धाम का उत्तराधिकारी?

Fri, 29 Dec 2017 08:55 AM IST
कमलेश जोशी/अमर उजाला, नैनीताल
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neem karoli baba
जिस विश्वप्रसिद्ध बाबा के आशीर्वाद ने पीएम मोदी, फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स को सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचाया आज उनका धाम बिना उत्तराधिकारी के है।
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siddhi mae
गुरुवार को सिद्धि मां के शरीर त्यागने के बाद अब कैंची धाम और अन्य कार्यों की देखरेख कौन करेगा अथवा सिद्धि मां का उत्तराधिकारी कौन होगा? इसे लेकर भी नगर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल उत्तराधिकारी को लेकर अभी किसी का नाम सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में उत्तराधिकारी को लेकर कुछ नाम सामने आ सकते हैं।
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli maharaj
कैंची धाम में बीते 42 साल से मंदिर की व्यवस्थाओं को देख रहीं सिद्धि माई नैनीताल के उच्च परिवार से ताल्लुक रखती थीं। जब पहली बार वे बाबा नीब करोरी महाराज से मिलीं तो उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर उनकी भक्त बनने का फैसला किया। बाबा ने भी उनके समर्पण को देखते हुए अपना शरीर त्यागने से पहले कैंची धाम की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी थी। सिद्धि माई भी अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक कैंची धाम की सेवा में जुटी रहीं।

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neem karoli baba
नीब करोरी महाराज के शरीर त्यागने के बाद से ही सिद्धि माई ट्रस्ट से जुड़ी सभी संस्थाओं की प्रमुख कर्ताधर्ता थीं। ट्रस्ट से जुड़े लोग बताते हैं कि बाबा नीब करोरी वर्ष 1962 में यहां आए थे। उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे अपनी धूनी रमाई। धीरे-धीरे यहां आसपास के लोगों का आना शुरू हो गया। 15 जून 1965 को बाबा नीब करोरी ने कैंची में हनुमान मंदिर की स्थापना की।
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli
इसी बीच नैनीताल में रहने वाली और उच्च परिवार से ताल्लुक रखने वाली सिद्धि साह (सिद्धि माई) भी कैंची धाम पहुंचीं। उन्होंने महाराज के सानिध्य में रहकर कैंची मंदिर की सेवा का संकल्प लिया। वह नीब करोरी महाराज की अनुपस्थिति में मंदिर के सभी कार्यों को खुद देखती थीं।
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli
नीम करोली बाबा ने शरीर छोड़ने से पहले सारी जिम्मेदारी सिद्धि माई को सौंप दी थी। सिद्धि मां की देखरेख में ही कैंची धाम आश्रम के साथ-साथ कई मंदिरों की स्थापना हुई। उन्होंने हर साल 15 जून को मंदिर में होने वाले महाभंडारे को भी जारी रखा।
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neem karoli baba
वह बाबा के विदेशी भक्तों से भी बराबर संपर्क बनाए रखतीं थीं। विदेशी भक्त सिद्धि माई के दर्शन के लिए कैंची धाम में डेरा डाले रहते थे। मंदिर कमेटी के प्रबंधक विनोद जोशी बताते हैं कि कैंची धाम के अलावा ट्रस्ट की अन्य संस्थाओं में भी सिद्धि मां से पूछे बगैर कोई काम नहीं होता था। अप्रैल से नवंबर तक वह कैंची धाम में ही रहती थीं।
 
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