अब चावल पात्र को समर्पित करते हुए वरुण देव का ध्यान करें। अब सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी और दक्षिणा को कलश में डालकर उसे कपड़े से ढक दें। अब भगवान विश्वकर्मा को फूल चढ़ाकर आशीर्वाद लें। अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती उतारें और सभी में प्रसाद बांट दें।