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ये है लोक संस्कृति की 'विरासत', देखना न मिस करिएगा

Wed, 02 Dec 2015 02:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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विरासत उत्सव में मंगलवार को लोक गीत-नृत्य और सितार सरोद की जुगलबंदी ने खूब वाहवाही बटोरी। देखें तस्वीरें...
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ये है लोक संस्कृति की 'विरासत', देखना न मिस करिएगा

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सायंकालीन कार्यक्रम की शुरुआत कुमाऊंनी लोक नृत्य से शुरू हुई।
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ये है लोक संस्कृति की 'विरासत', देखना न मिस करिएगा

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प्रसिद्ध लोक कलाकार व कला शिक्षक गिरीश सनवाल पहाड़ी के निर्देशन में में लोक कलाकारों ने मनभावन गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी।

ये है लोक संस्कृति की 'विरासत', देखना न मिस करिएगा

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जौनसारी, कुमाऊंनी और गढ़वाली संगीत-गीत में बड़ा नाम शकुंतला रमोला ने लोकगीत मोहना मोहना... के जरिए माहौल को खुशनुमा कर दिया।
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दूसरे सत्र में क्लासिकल संगीत के महारथी बलवंत राय वर्मा, पंडित उमाशंकर मिश्रा, शरण रानी, पंडित तेजेंद्र मजूमदार व गुढेचा भाइयों के शिष्य लक्ष्य मोहन गुप्ता व आयुष मोहन गुप्ता ने नायाब सितार-सरोद जुगलबंदी की प्रस्तुति दी।
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