रुड़की में चल रहे डिजिटल इंडिया सप्ताह कार्यक्रम के तहत सालियर गांव में उस समय ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया जब इंटरनेट में न तो कनेक्टिविटी आई और न ही उनकी समस्याएं सुनने के लिए अधिकारी पहुंचे।
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जब डिजिटल इंडिया में इंटरनेट की जगह चल गए जूते
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मंगलवार को अपनी समस्याएं सुनाने के लिए करीब 300 ग्रामीण पंचायत घर में मौजूद थे। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गांववालों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसके बाद मामला इतना बढ़ा कि दो पक्षों में जमकर चप्पल-जूते चले।
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डिजिटल इंडिया सप्ताह का मंगलवार (7 जून) को समापन था। इसके तहत सालियर गांव के पंचायत घर में भी कांफ्रेंसिंग का आयोजन किया गया। सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जिनमें काफी महिलाएं भी शामिल थीं, पंचायत घर में एकत्र हो गई। ग्रामीणों को इस बात का इंतजार था कि उनकी मुख्यमंत्री से बात कराई जाएगी और मौके पर आने वाले अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनेंगे।
जब डिजिटल इंडिया में इंटरनेट की जगह चल गए जूते
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पंचायतघर में बीएसएनएल की ओर से मंडल अभियंता डीके शर्मा आदि अधिकारी मौजूद थे, लेकिन जिले स्तर से कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया। रुड़की की खंड विकास अधिकारी शिवरानी चौहान, लेखपाल और ग्राम विकास सचिव करीब 11 बजे आए। पंचायत घर में कुछ देर रुकने के बाद सभी अधिकारी यह कहते हुए चले गए कि अब कोई बात नहीं होगी। इस पर ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया।
अंबेडकर सर्व समाज समिति के अध्यक्ष करम सिंह बर्मन, बिजेंद्र सैनी आदि के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि उन्हें मौके पर ही समस्याओं के निराकरण कराने, इंटरनेट पर उनकी मुख्यमंत्री से बात कराने की बात कही गई थी जिस कारण बहुत से कामकाजी लोग अपना काम छोड़कर पंचायत घर में कई घंटों से जमा थे।