फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Silkyara Tunnel: जिन पाइपों से बाहर निकाले थे मजदूर, अब उन्हीं से जवानों संग सुरंग में जाएंगे श्रमिक

Tue, 13 Feb 2024 02:08 PM IST
अलका त्यागी अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी
विज्ञापन
1 of 5
सुरंग में पाइप से जाएंगे श्रमिक - फोटो : अमर उजाला
उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में डी-वाटरिंग काम दो से तीन दिन में शुरू हो जाएगा। इसके लिए सुरंग में भूस्खलन वाले छोर के निकट हॉरिजेंटल स्ट्रेंग्थनिंग (क्षैतिज सुदृढ़ीकरण) का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।

आपात स्थिति में बचाव के लिए ह्यूम पाइप बिछाने का काम भी अंतिम चरण में है। वहीं डी-वाटरिंग के लिए एसडीआरएफ से संपर्क किया गया है। निर्माण कार्य में लगे श्रमिक एसडीआरएफ जवानों के साथ ही मलबे में ऑगर मशीन से डाले पाइपों के जरिए सुरंग के अंदर जाएंगे।

सुरंग में सिलक्यारा छोर से डी-वाटरिंग चालू करने के लिए आठ से 10 लोगों को ऑगर मशीन से डाले गए पाइपों के जरिये अंदर भेजा जाएगा। इन्हीं पाइपों का इस्तेमाल हादसे के बाद अंदर फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए किया गया था।

Uttarkashi Tunnel: रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद फिर सुरंग निर्माण के मोर्चे पर कर्नल पाटिल, मिला सेवा विस्तार

कर्नल दीपक पाटिल ने बताया कि सुरक्षा को देखते हुए श्रमिकों एसडीआरएफ के जवानों के साथ भेजा जाएगा। सुरक्षा के लिए कैमरा, रेडियो सैट, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि ले जाने की भी तैयारी है। जिससे किसी तरह की दिक्कत न हो।
विज्ञापन

2 of 5
सुरंग - फोटो : अमर उजाला
यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा पोलगांव सुरंग में भूस्खलन का मलबा निर्माण में बाधा बना हुआ है। इस मलबे के कारण सुरंग के सिलक्यारा छोर से डी-वाटरिंग शुरू नहीं हो पाई है। फिलहाल, यहां डी-वाटरिंग के लिए सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। जो कि अब अंतिम चरण में हैं।
विज्ञापन

3 of 5
सुरंग के ऊपर से ड्रिलिंग - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षात्मक कार्य के तहत सुरंग के मुहाने से 150 से 200 मीटर तक क्षैतिज सुदृढ़ीकरण का काम किया गया है। जिसके तहत सुरंग के अंदर कमजोर हिस्से पर प्राथमिक सपोर्ट के लिए आई-बीम को बैंड कर सी-शेप में रिब्स लगाई गई हैं।

4 of 5
पाइप में ड्रिल करती टीम - फोटो : अमर उजाला
जिसे और ज्यादा मजबूती देने के लिए डी-शेप बदला गया है। इसके अलावा आपात स्थिति के लिए 80 से 203 मीटर तक 800 एमएम के ह्यूम पाइप बिछाए गए हैं। जिससे सुरंग धंसने जैसी आपात स्थिति होती है तो अंदर काम करने वाले लोग इन पाइपों के सहारे बाहर आ जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कर्नल पाटिल - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षात्मक कार्य अंतिम चरण में हैं। दो से तीन दिन में डी-वाटरिंग का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए एसडीआरएफ से संपर्क किया गया है। डी-वाटरिंग में समय लगेगा। भूस्खलन का मलबा हटाने के बाद ही सुरंग का निर्माण शुरू होगा।
- कर्नल दीपक पाटिल, महाप्रबंधक एनएचआईडीसीएल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें