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Uttarkashi Tunnel: रेस्क्यू को सात दिन, उम्मीदों को फिर झटका...41 जिंदगियां बचाने जा रहा पाइप 22 मी. पर अटका

Sat, 18 Nov 2023 11:17 AM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
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उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला

सिलक्यारा सुरंग में पिछले छह दिन से फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए चल रहे बचाव अभियान के तहत सुरंग में 22 मीटर तक ड्रिल के बाद काम रुक गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि ड्रिलिंग का काम कर रही अमेरिकी ऑगर मशीन की बेरिंग में खराबी आ गई है, इसी कारण काम रुका है।

वहीं, एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि मशीन चलने से हो रहे कंपन के कारण सतह का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे मलबा गिरने का खतरा है, इस कारण भी बीच में काम रोकने का निर्णय लिया गया है।दरअसल यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा से पोलगांव तक प्रस्तावित 4.5 किमी लंबी सुरंग में भूस्खलन होने से 40 मजदूर छह दिन से फंसे हुए हैं।

मजदूरों को निकालने के लिए पहले जेसीबी आदि मशीनों से मलबा हटाया जा रहा था, लेकिन बार-बार मलबा गिरने पर सोमवार को देहरादून से ऑगर मशीन मंगाकर ड्रिलिंग शुरू की गई, लेकिन इसकी क्षमता कम होने के कारण

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उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला

बुधवार को दिल्ली से वायुसेना के तीन हरक्यूलिस विमानों से 25 टन वजनी अमेरिकी ऑगर मशीन मंगवाई गई। जिससे बृहस्पतिवार सुबह दस बजे ड्रिलिंग शुरू की गई थी, लेकिन एक पाइप को डालने में औसतन चार से छह घंटे का समय लग रहा है। सबसे ज्यादा सावधानी दो पाइपों को आपस में जोड़ने के लिए वेल्डिंग करते समय बरतनी पड़ रही है। इस काम में ही डेढ़ से दो घंटे का समय लग रहा है।

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उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला

शुक्रवार शाम एनएचआईडीसीएल ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि मशीन के बेयरिंग में खराबी आने के कारण काम रोक दिया गया है। हालांकि शाम को प्रेसवार्ता कर एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खलखो ने बताया कि अमेरिकी ऑगर मशीन से 22 मीटर ड्रिलिंग का काम किया गया है। सुरंग के अंदर 1750 हार्स पॉवर की ऑगर मशीन के चलने से कंपन हो रहा है। जिससे सतह का संतुलन बिगड़ रहा है।

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उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला

इसके चलते मलबा गिरने का खतरा है। इसे ध्यान में रखते हुए अब बीच में कुछ समय रुकेंगे और फिर काम शुरू करेंगे। चौथे पाइप का दो मीटर हिस्सा वेल्डिंग के लिए बाहर छोड़ा गया है। पांचवें पाइप को वेल्डिंग कर जोड़ दिया गया है। कुछ समय बाद इसको डालने के लिए ड्रिलिंग का काम शुरू किया जाएगा। बेरिंग खराब होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब मशीन चलती है तो बेरिंग खराब होती ही है, जिसे बदला जाएगा।

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उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला

मलबे में पड़े चट्टानी बोल्डर पाइप डालने के लिए की जा रही ड्रिलिंग में बाधा बन रहे हैं। शुक्रवार सुबह जब चौथा पाइप डाला जा रहा था तो किसी कठोर वस्तु के चलते ड्रिलिंग का काम बाधित हुआ। जिस पर मजदूरों ने पाइप के अंदर घुसकर जांच की तो यह बोल्डर निकला, जिसे हटाया गया। फिर दोबारा ड्रिलिंग शुरू हुई, लेकिन दोपहर बाद दोबारा चट्टानी बोल्डर आगे आ गया, जिसके बाद से ड्रिलिंग का काम रुका हुआ है।

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उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला
ऑगर मशीन डीजल से चलती है। सुरंग के अंदर डीजल मशीन से वेंटिलेशन में दिक्कत आ रही है। ऐसे में वेंटिलेशन के लिए कंप्रेशर चलाया जा रहा है। जिससे सुरंग में वाइब्रेशन (कंपन) बढ़ रहा है। एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि डीजल मशीन के चलते वेंटिलेशन में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए बीच-बीच में कंप्रेशर चलाकर हवा को बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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