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उत्तराखंड: दो दिन राहत के बाद फिर धधके 'पहाड़', 24 घंटे में जल गया 133 हेक्टेयर जंगल

Thu, 15 Apr 2021 10:30 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में जंगल की आग - फोटो : अमर उजाला
एक बार फिर उत्तराखंड के जंगलों में आग के मामलों में इजाफा हुआ है। पिछले दो दिन की राहत के बाद बृहस्पतिवार को प्रदेश में 133 हेक्टेयर जंगल जल गया। वनाग्नि के करीब 90 मामले सामने आए हैं।

दो दिन से प्रदेश में वनाग्नि के 20 से कम ही मामले रिपोर्ट किए जा रहे थे। बृहस्पतिवार को नजारा फिर बदला हुआ दिखाई दिया। वनाग्नि के करीब 90 मामले सामने आए और 133 हेक्टेयर जंगल जल गया।

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वन विभाग की ओर से जारी फायर बुलेटिन के मुताबिक गढ़वाल मंगल में 44 और कुमाऊं मंडल में 32 मामले रिपोर्ट किए गए। वन्यजीव क्षेत्र में 34 मामले सामने आए। कुल मिलाकर 133.27 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुआ।

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प्रदेश में आग के ये मामले सिविल वनों की तुलना में आरक्षित वनों में अधिक आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आग से करीब 100 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र और 32 हेक्टेयर सिविल वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
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उत्तराखंड में जंगल की आग - फोटो : अमर उजाला
अप्रैल में अभी तक 1820 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। आग बुझाने में एक की मौत हो चुकी है और दो घायल हुए हैं। इसके अलावा 12 पशुओं की मौत हुई है। अप्रैल में ही नुकसान का आंकड़ा 41 लाख तक पहुंच चुका है। करीब 1200 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र और 629 हेक्टेयर सिविल वन क्षेत्र को नुकसान हुआ है। 
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
आग के बढ़ते मामलों को देख वन विभाग ने अपील भी जारी की है। अपील में लोगों से कहा गया है कि जंगल में कोई भी जलती हुई वस्तु न छोड़ें। चरवाहों से कहा गया है कि अलाव जलाएं तो उसे बाद में बुझा भी दें। प्रदेश में ज्यादातर चीड़ के वनों में ही आग की घटनाएं अधिक हो रही हैं।

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जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में मई और जून का महीना वनाग्नि के लिए जाना जाता है। इसको देखते हुए वन विभाग ने तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी ने बताया कि एनडीआरएफ से संपर्क किया गया है और क्रू स्टेशन भी बढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही शुक्रवार को साप्ताहिक समीक्षा भी की जाएगी।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
मसूरी के जंगलों में भी चारों ओर आग लगी है, जिससे लाखों की वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। वनकर्मी आग बुझाने के लगातार प्रयास कर रहे है, लेकिन तेज हवा और संसाधनों का अभाव आग बुझाने में बाधा बन रही है। शहर के जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
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