दशरथ माझी तो याद ही होंगे आपको.... जी हां वो ही दशरथ मांझी जिन्होंने पहाड़ काटकर सड़क बना दी थी। उत्तराखंड के सतभैया कोट तोक के ग्रामीणों की कहानी भी दशरथ मांझी से कम नहीं है। आगे तस्वीरों में देखिए...
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- फोटो : अमर उजाला
चमोली जिले के सतभैया कोट तोक गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जब कोई आगे नहीं आया, तो ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने की ठान ली। ग्रामीणों ने फावड़ा और कुदाल उठाई और दो महीने में दो किलोमीटर तक सड़क बना डाली। गांव तक जब सड़क पहुंची तो ग्रामीण ढोक की थाप पर जमकर झूमे।
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ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में सदभैया गांव पलायन की मार झेल रहा था। गांव में इस वक्त 15 परिवार रहते हैं। गांव से मुख्य सड़क की दूरी ज्यादा होने से कई परिवार पहले ही गांव छोड़कर जा चुके हैं। इसलिए अब ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठाया।
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इसके लिए उन्होंने मैदानी क्षेत्र में रह रहे लोगों से भी सहयोग लिया। ग्रामीणों ने करीब सात लाख रुपये एकत्र किए और फावड़े, कुदाल और अन्य निर्माण सामग्री खरीदी। इसके बाद सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया।
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ग्राम प्रधान त्रिलोक सिंह बर्त्वाल ने बताया कि ग्रामीणों के आपसी सहयोग से कच्ची सड़क के निर्माण का काम पूरा हो गया है। अब सड़क के डामरीकरण व पुश्तों के निर्माण के लिए जिला प्रशासन से सहयोग मांगा जाएगा।
सड़क निर्माण में प्रदीप सिंह नेगी, सुनील नेगी, त्रिलोक नेगी, पूरण नेगी, शिव दर्शन सिंह नेगी, प्रेम रावत, संतोष रावत, वन सरपंच मदन रावत ने सहयोग दिया। गांव तक सड़क मार्ग बनने से अब ग्रामीण खुश हैं।