देवभूमि उत्तराखंड में स्थित यह अद्भुत मंदिर महाभारत काल में भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिए बनाया गया था। तस्वीरों में देखें...
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पहाड़ों की गोद में बसे इस मंदिर में छिपा है भगवान शिव का एक बड़ा रहस्य
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यह मंदिर एक हजार साल पुराना है और पंच केदारों में यह सबसे ऊंचाई पर मौजूद है। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। यह मंदिर चोपता से 03 किमी दूर स्थित है।
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माना जाता है कि कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार के कारण शिवजी पांडवों से
नाराज हो गए थे। उनका गुस्सा शांत करने के लिए ही पांडवों ने तुंगनाथ
मंदिर का निर्माण किया था।
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तुंगनाथ उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक पर्वत है। इस पर्वत पर ही तुंगनाथ स्थित मंदिर है। तुंगनाथ मंदिर 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पंच केदारों में से एक रूप में भगवान शिव की पूजा होती है।
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ये क्षेत्र गढ़वाल हिमालय के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। जुलाई-अगस्त के महीनों में यहां मीलों तक फैले मखमली घास के बुग्याल स्वर्ग में होने का अहसास कराते हैं। यहां के मैदानों की तुलना स्विट्जरलैंड से की जाती है।
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सबसे विशेष बात ये है कि गढ़वाल क्षेत्र में ये एक मात्र क्षेत्र है जहां बस द्वारा बुग्यालों में सीधा प्रवेश किया जा सकता है। मई से नवंबर तक यहां कि यात्रा की जा सकती है।
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जनवरी व फरवरी के महीने में भी यहां की बर्फ की मजा लेने जाया जा सकता है। चोपता की ओर बढते हुए रास्ते में बांस और बुरांश का घना जंगल और मनोहारी दृश्य पर्यटकों को लुभाते हैं।
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यहां के बुग्यालों में कस्तूरी मृगों की सुंदरता को निकटता से देखा जा सकता है। चोपता के बारे में एक ब्रिटिश अधिकारी ने कहा था कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में चोपता नहीं देखा उसका इस पृथ्वी पर जन्म लेना व्यर्थ है।