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रक्षाबंधन से पहले लद्दाख बॉर्डर पर शहीद हुआ भाई, तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देख बिलख पड़ी बहन

Wed, 22 Jul 2020 09:03 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लालपुर (ऊधमसिंह नगर)
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- फोटो : अमर उजाला
लद्दाख में शहीद हुए उत्तराखंड के के लाल देव बहादुर का ग्राम गोरीकलां के निकट शमशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि शहीद के पिता शेर बहादुर ने दी। रक्षा बंधन से पहले भाई को खोने का गम बहन के चेहरे पर भी साफ झलक रहा था। 
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- फोटो : अमर उजाला
तिरंगे में लिपटे भाई के शव को देख बहन बिलख पड़ी। परिवार वालों का रो रोकर बुरा हाल है। परिजनों को रोता-बिलखता देख मौके पर जमा लोगों की आंखें भी नम हो गईं। बहन बार-बार चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि भइया तुम खुद चल कर क्यों नही आ रहे हो। बहन गीता ने बड़े अरमानों से भाई की कलाई के लिए राखी खरीदी थी। लेकिन उसे क्या पता था कि रक्षाबंधन आने से पहले ही उसका प्यारा भाई देश के लिए बलिदान हो जाएगा। भाई की पार्थिव देह ताबूत में देखकर सुधबुध खो बैठी गीता ने होश आने पर राखी को ताबूत पर बांध दिया। 
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- फोटो : अमर उजाला
शहीद का शव लालपुर पहुंचने की सूचना घर वालों को मिली तो देव बहादुर के दोनों भाई किशन व अनुज भी वहां पहुंच गए। एंबुलेंस में भाई का शव देखकर छोटा भाई अनुज होश खो बैठा। बेसुध होकर गिरने से पहले ही दोस्तों और विधायक शुक्ला ने उसे संभाल लिया। विधायक और दोस्तों ने समझा कर उसे हिम्मत दी। 

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- फोटो : अमर उजाला
शहीद देव बहादुर का शव तीन दिन बाद पहले एंबुलेंस और फिर सैन्य वाहन से उनके गांव पहुंचा। स्थानीय लोगों और नौजवान जुलूस की शक्ल में सैन्य वाहन को गांव तक ले गए। रास्ते में सड़क किनारे और घरों की छतों में खड़े होकर लोगों ने शहीद को नमन किया। 
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- फोटो : अमर उजाला
बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे कुछ लोग सड़क पर टहल रहे थे। इसी बीच लालपुर नगला मार्ग पर एक एंबुलेंस आकर रुकी। पहले तो लोगों ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन थोड़ी देर बाद कुछ युवक एंबुलेंस के पास गए तो चालक ने वाहन में शहीद देव बहादुर का पार्थिव शरीर होने की जानकारी दी। यह जानकारी मिलते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। 
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- फोटो : अमर उजाला
बच्चे, बूढ़े, जवानों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं शहीद के दर्शन को पहुंच गया। देखते ही देखते पूरा इलाका भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा देव तुम्हारा नाम रहेगा, वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा। लोग शहीद के अंतिम दर्शन के लिए मकान की बालकनी और छतों पर पहुंच गए। 
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- फोटो : अमर उजाला
लोग शहीद की एक झलक पाने के लिए लालायित थे। करीब दो घंटे तक सैन्य वाहन के इंतजार में एंबुलेंस लालपुर में रुकी रही। सेना का वाहन नगला होते हुए रामेश्वरपुर गांव पहुंचा और एंबुलेंस से पार्थिव देह को सैन्य वाहन में रखा गया। नौजवान तिरंगे के साथ शहीद का फोटो लेकर अपने-अपने वाहनों से वहां पहुंचे थे। 
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