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उत्तराखंड सियासी संकट: मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त, चर्चाओं में कई नाम

Sat, 03 Jul 2021 11:48 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
114 दिन की सत्ता संभालने के बाद तीरथ सिंह रावत की विदाई के साथ उत्तराखंड में नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। इस बार मुख्यमंत्री पद पर किसने नाम की लॉटरी लगेगी। सियासी गलियारों में सत्ता से जुड़े कई नेताओं के नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा किसके नाम पर दांव खेलेगी। पार्टी हाईकमान का यह फैसला चौकाने वाला हो सकता है। प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले भाजपा के लिए नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी करना चौकाने वाला फैसला हो सकता है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे चेहरे को लाना है, जिसके नाम पर चुनाव लड़ा जा सकता है। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं के बीच जातीय और क्षेत्र संतुलन को भी बनाना है। सियासी गलियारों में नए मुख्यमंत्री के रूप में सिटिंग विधायक पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत, पुष्कर सिंह धामी व बिशन सिंह चुफाल के नाम की चर्चा है।
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रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
यदि पार्टी हाईकमान विधायकों में से मुख्यमंत्री नहीं बनाती है तो सांसदों में केंद्रीय मंत्री व पूर्व सीएम डा. रमेश पोखरियाल निशंक, अनिल बलूनी, अजय भट्ट के नाम की चर्चा है। जबकि सीएम के पद के लिए महिला दावेदार में राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य, विधायक ऋतू खंडूड़ी की चर्चा है। उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री की दौड़ में एक और नाम बिशन सिंह चुफाल का जुड़ गया है। भाजपा विधायक दल में चुफाल ऐसे विधायक हैं, जो वरिष्ठता क्रम में देहरादून कैंट के विधायक हरबंस सिंह भल्ला के बाद दूसरे नंबर पर हैं। पिथौरागढ़ के डीडीहाट से विधायक चुफाल उत्तराखंड के गठन के बाद से कभी चुनाव नहीं हारे। वह अभी मंत्री हैं और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के प्रमुख विरोधी माने जाते हैं। कहा जाता है कि इसी वजह से त्रिवेंद्र ने उन्हें कभी मंत्री नहीं बनाया। त्रिवेंद्र के इस्तीफे के बाद भी चुफाल के नाम की चर्चा हुई थी, लेकिन एन वक्त पर तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना दिया गया। चुफाल कुमाऊं से हैं।
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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
नौ मार्च 2021 को त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उस समय भी अंतिम समय तक नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस था। त्रिवेंद्र सिंह ने तीरथ सिंह रावत के नाम प्रस्ताव रख कर सबको चौंका दिया था। इस बार भाजपा का नए सीएम को लेकर चौंकाने वाला फैसला हो सकता है।

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तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से कई अरमान अधूरे रहे गए और कई फैसले परवान नहीं चढ़ पाए। कोविड महामारी की चुनौती से निपटने में बतौर सीएम 114 दिन में कार्यकाल समाप्त हो गया। कुर्सी संभालते ही खुद संक्रमित हो गए। वहीं, दूसरी लहर ने कामकाज की रफ्तार बढ़ाने में मुश्किल खड़ी कर दी थी। 
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तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
10 मार्च को तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। सत्ता संभालते ही उन्होंने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में लिए गए फैसलों को पलटने में कोई गुरेज नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला विकास प्राधिकरण को लागू करने, चारधाम देवस्थानम बोर्ड, गैरसैंण में कमिश्नरी पर जनता की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लेने का एलान किया था। प्रदेश के विकास को लेकर जो उनके अरमान थे। वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ अधूरे रहे गए।
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