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उत्तराखंड में जंगलों की आग से मचा हाहाकार, कई हेक्टेयर जंगल खाक, करोड़ों की वन सम्पदा बर्बाद, तस्वीरें

Wed, 31 Mar 2021 03:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • नर्सिंग कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय के समीप पहुंची आग
  • चमोली में आग से अभी तक 69.50 हेक्टेयर जंगल जला
  • गोदी गांव के पास जंगल में लगी आग, ग्रामीणों में अफरातफरी
  • कई दिन से जल रहे कीर्तिनगर क्षेत्र के जंगल 
  • जंगल की आग से लैंसडौन छावनी कूड़ाघर जला
  • वनाग्नि की घटनाएं बनी परेशानी का सबब
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में जंगलों की आग कम होने का नाम नहीं ले रही है। अभी फायर सीजन शुरू ही हुआ है कि उत्तराखंड के जंगल आग में खाक हो रहे हैं। कहीं-कहीं तो कई दिनों से जंगल धधक रहे हैं। गोपेश्वर के कोठियालसैंण के जंगलों में मंगलवार को चीड़ की सूखी पत्तियों पर आग भड़क गई। देखते ही देखते आग नर्सिंग कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय भवन के समीप पहुंच गई। नर्सिंग कॉलेज प्रशासन ने अग्निशमन दल को सूचना दी। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, जिससे कॉलेज भवन आग की चपेट में आने से बच गया। वहीं, बदरीनाथ हाईवे के समीप के जंगलों में भी कई दिनों से आग भड़की हुई है। मंगलवार दोपहर तेज आंधी तूफान से आग ऊंचाई वाले जंगलों तक पहुंच गई, जिससे कई हेक्टेयर वन संपदा जलकर राख हो गई। बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह का कहना है कि चीड़ के जंगलों में असामाजिक तत्वों की ओर से सूखी पत्तियों पर आग लगाई जा रही है। आग बुझाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। बीते दिनों हुई बारिश के कारण जंगलों की आग बुझ गई थी, लेकिन अब फिर से जंगलों में आग भड़कने लगी है। चमोली जिले में इस वर्ष अभी तक आग लगने की 72 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 69.50 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुका है। सबसे अधिक आग बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत के जंगलों में लगी है। यहां अभी तक 21.30 हेक्टेयर जंगल जल चुका है, जबकि केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत 19.45 हेक्टेयर, अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग में 7.50 हे. और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क जोशीमठ में 4.25 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। 
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
वहीं स्टेट हाईवे से सटे लैंसडौन वन प्रभाग के दुगड्डा रेंज के जंगल में आग लगने से निकटवर्ती गोदी गांव के ग्रामीणों में अफरा तफरी मच गई। सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई। मंगलवार दोपहर को लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेज के सिलगाड़ बीट के जंगल में अचानक आग लग गई। सूचना पर पहुंचे वन विभाग के अग्निशमन दस्ते के साथ ग्रामीणों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। रेंज अधिकारी किशोर नौटियाल ने बताया कि सिलगाड़ बीट में लगी आग को बुझा दिया गया। 
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
श्रीनगर में कीर्तिनगर क्षेत्र का जंगल कई दिनों से आग में जल रहा है। हालांकि वन विभाग आग बुझाने में जुटा हुआ है, लेकिन संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। होली के दिन चौरास क्षेत्र में शरारती तत्वों ने कई स्थानों पर आग लगा दी थी। शाम को तेज हवा चलने से आग तेजी से काफी बड़े क्षेत्र में फैल गई। रात भर जंगलों में आग की तेज लपटें वन संपदा को जलाती रहीं। नैथाणा क्षेत्र को देख रहे वन आरक्षी अभिषेक नेगी ने बताया कि सोमवार को काफी हद तक आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन मंगलवार को किसी ने जैधार के पास फिर आग लगा दी।

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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
लैंसडौन में जंगल में लगी आग छावनी परिषद के कूड़ाघर तक पहुंच गई, जिससे रिसाइकिलिंग के बाद एकत्र कूड़ा जल गया। रिसाइकिलिंग के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली हाइड्रोलिक कंप्रेसर मशीन भी जल गई। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आर्मी के जवानों और सफाई कर्मियों ने आग पर काबू पाया। इसके अलावा गीले कूड़े से बनी कंपोस्ट खाद का एक खेत व उस पर बनी कंपोस्ट खाद, कूड़ा संशोधन संयंत्र की बिजली की लाइन भी आग की भेंट चढ़ गई है।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग - फोटो : अमर उजाला
लगातार हो रही वनाग्नि की घटनाओं के कारण वातावरण में चारों तरफ धुंध छाई हुई है, जिससे गर्मी का प्रकोप दिनों दिन बढ़ रहा है। मौसम की बेरुखी के बीच जंगलों में आए दिन आग की घटनाएं हो रही हैं, जिससे अभी तक करोड़ों की वन संपदा जलकर नष्ट हो चुकी है। साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से लगे गांवों के जंगलों में बीते दो माह में पांच से छह बार आग लग चुकी है। वनाग्नि के कारण पैदल मार्गों से लेकर सड़कों पर पत्थर गिरने का खतरा भी बना हुआ है।
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