वहीं, मसूरी के अंग्रेजी लेखक गणेश सैली भी इस बात का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि पुरानी मान्यता है कि कुएं में कोई अंगूठी या सिक्का डालने से मनोकामना पूरी होती है। आज भी इस कुएं में लोग पीछे मुड़कर सिक्का डालते हैं। इससे कुएं का नाम विशिंग वेल भी पड़ गया है।