फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्टार्टअप : भूल जाइए बार्बी डॉल, घर ले आइए जुन्याली पहाड़ी डॉल, तस्वीरें बेहद सुंदर

Wed, 05 Aug 2020 03:41 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश
विज्ञापन
1 of 9
- फोटो : amar ujala
बचपन में बार्बी डॉल किसी भी बच्चे का सपना होता है। लेकिन अब आप बॉर्बी डॉल की जगह अपने बच्चे को पहाड़ी डॉल (जुन्याली) भेंट कर सकते हैं। इसके दो फायदें हैं। एक तो बच्चे को डॉल मिल जाएगी और दूसरा यह डॉल आपके बच्चे को पहाड़ के रंग-रूप, संस्कृति, वेषभूषा और बोली से रूबरू कराएगी।
विज्ञापन

2 of 9
- फोटो : amar ujala
जी हां, कुछ ऐसी ही है अपनी पहाड़ी डॉल जुन्याली। जिसे स्टार्टअप के तहत लॉच किया है तीन दोस्तों दीप नेगी, पंकज अधिकारी और अक्की अधिकारी ने। अपनी लॉचिंग के बाद धीरे-धीरे जुन्याली घर-घर में अपनी जगह बना रही है। पहाड़ के रंगों और वेषभूषा में लिपटी इस गुड़िया को आप बच्चों को गिफ्ट करने के अलावा अपने ड्राइंगरूम और दफ्तर में भी सजा सकते हैं।
विज्ञापन

3 of 9
- फोटो : amar ujala
टिहरी गढ़वाल के जुवा पट्टी के सुनार गांव के दीप नेगी वर्तमान में दुबई में हेल्थकेयर कंपनी में लर्निंग स्पेशलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। जबकि इसी पट्टी के अलेरू गांव के पंकज व अक्की अधिकारी वर्तमान में गुड़गांव में प्राइवेट कंपनी में अच्छे पदों में कार्यरत हैं। तीनों दोस्तों ने स्टार्टअप के तहत कुछ अलग करने की सोची तो जुन्याली गुड़िया का जन्म हुआ।

4 of 9
- फोटो : amar ujala
यूं तो जुन्याली की हार्ड बॉडी विदेशों से आयात होती है, लेकिन यहां दिल्ली और टिहरी में जुन्याली की पारंपरिक पोशाक घाघरा, गुलाबंद , पिछोड़ा, टाल्खा, कोटि, पहाड़ी टोपी, घिल्डा, टोकरी आदि तैयार की जाती है। यहीं उसे उसका पहाड़ी रंग-रूप और आकार दिया जाता है। जुन्याली को आप पहाड़ की पहली म्यूजिकल डॉल भी कह सकते हैं।
 
विज्ञापन

5 of 9
- फोटो : amar ujala
इस काम को अंजाम देने वाले तीनों युवाओं का कहना है कि यह केवल एक खिलौना मात्र नहीं है, बल्कि कई अभिभावकों का सपना है कि वो अपने बच्चों से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक भाषा को बोलते हुए सुनें या कम से कम उन्हें इसकी जानकारी हो। इसीलिए हमने अपने बच्चों के लिए इस संगीतमय गुड़िया का सपना देखा, ताकि उनकी छोटी उम्र से ही वो हमारी संस्कृति और भाषा के प्रति रुचि लें और वो इसकी ओर आकर्षित भी हों।
 
विज्ञापन

6 of 9
- फोटो : amar ujala
अच्छी बात यह है की जुन्याली को छोटे बच्चों के अलावा बड़े लोगों का भी प्यार मिल रहा है। वे इसे बच्चों को गिफ्ट करने के आलवा अपने घर-दफ्तर में सजा रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी जुन्याली को बहुत पसंद किया और इस स्टार्टअप की सराहना की। 
 
विज्ञापन

7 of 9
- फोटो : amar ujala
हमने जुन्याली को बाजार में उतारने से पहले 'फ्योंली एन्ड पाइन्स' कंपनी की स्थापना की। रिवर्स माइग्रेशन को ध्यान में रखते हुए जुन्याली के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यहां के लोगों का इससे जोड़ना चाहते थे। आज जुन्याली का सिर्फ शरीर बाहर से आयात होता है, जबकि उसके कपड़े से लेकर धागा तक उत्तराखंड में ही विशेषकर समूह से जुड़ी महिलाएं तैयार कर रही हैं।

8 of 9
- फोटो : amar ujala
इस तरह मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा हम उन लोगों में बांट देते हैं, जो इस काम को अंजाम दे रहे हैं। कोई जुन्याली की पोशाक तैयार कर रहा है तो कोई उसका घाघरा, गुलाबंद, पिछोड़ा, टाल्खा, कोटि, पहाड़ी टोपी, घिल्डा , टोकरी आदि। इस तरह एक गुड़िया कई लोगों को रोजगार दे रही है। हमें उम्मीद है, जुन्याली बॉर्बी डॉल की तरह ही जल्दी पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाएगी। 
- दीप नेगी, मार्केटिंग हेड, फ्योंली एन्ड पाइन्स कंपनी  
विज्ञापन

9 of 9
- फोटो : amar ujala
जुन्याली गुड़िया की विशेषताएं
- लचीली गुणवत्ता के कारण, गुड़िया की मुद्रा (सिर, हाथ) को बदला जा सकता है। 
- इसमें सात प्रसिद्ध पहाड़ी गीतों (गढ़वाली, कुमाऊंनी) की श्रृंखला है, जो  60-सेकेंड बजती है। 
- गुड़िया पहाड़ी गीतों पर नृत्य भी करती है ।
- नृत्य ऑप्शन को अगर लॉक लिया जाय तो गुड़िया सिर्फ पहाड़ी गीत गाती है।
- इसमें रंगीन-चमकदार पंख हैं, जो की अंधेरे में चमकते हैं ।
- इसकी आंखें थ्रीडी हैं, जो की वास्तविक लगती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें