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उत्तराखंड : साइकिल से तय की रोमांचक दुर्गम यात्रा, 4600 मीटर ऊंचाई पर सतोपंथ पहुंचे सोमेश, तस्वीरें

Fri, 02 Jul 2021 03:38 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ

सार

साइकिल से पहली बार कोई व्यक्ति सतोपंथ पहुंचा है। करीब 50 किमी के इस सफर को पांच दिन में पूरा कर सोमेश पंवार गुरुवार को बदरीनाथ लौटे।
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सतोपंथ - फोटो : अमर उजाला
पांडुकेश्वर निवासी सोमेश पंवार सतोपंथ के अति दुर्गम पैदल मार्ग पर साइकिल से यात्रा कर लौट आए हैं। उन्होंने बदरीनाथ से सतोपंथ तक 50 किमी की यात्रा पांच दिन में पूरी की। स्वच्छ हिमालय का संदेश देने और कोरोना से विश्व को मुक्ति की कामना के उद्देश्य से उन्होंने यह यात्रा की थी। साइकिल से पहली बार कोई व्यक्ति सतोपंथ पहुंचा है। करीब 50 किमी के इस सफर को पांच दिन में पूरा कर सोमेश पंवार गुरुवार को बदरीनाथ लौटे। साइकिल से कई यात्राएं करने वाले सोमेश का कहना है कि खतरनाक रास्ते, पहाड़ी ढलान, बड़े-बड़े बोल्डरों को पार करते हुए पहाड़ पर साइकिल चढ़ाना खतरनाक तो है, लेकिन साहसिक व रोमांचकारी भी है। सोमेश साइकिल से जोखिम भरी यात्रा करने के लिए जाने जाते हैं। पिछले साल उन्होंने माणा गांव से कन्याकुमारी तक 4035 किमी की यात्रा साइकिल से पूरी की थी। साथ ही वह पंच बदरी की यात्रा भी साइकिल से कर चुके हैं। बदरीनाथ से 25 किमी दूर सतोपंथ में प्राकृतिक झील के साथ ही हिमालय की सुंदरता श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
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सतोपंथ - फोटो : अमर उजाला
सबसे कठिन ट्रेक में शुमार इस ट्रेक पर अब धीरे-धीरे स्थानीय ट्रेकर और लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
 
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सतोपंथ - फोटो : अमर उजाला
समुद्र तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंथ ताल का सफर माणा से होकर गुजरता है। बसुधारा होकर इस ट्रेक पर जाया जाता है। 

 

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सतोपंथ - फोटो : अमर उजाला
त्रिकोणीय आकार की सतोपंथ झील प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर तो है ही साथ ही इसका धार्मिक महत्व भी है।
 
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somesh - फोटो : अमर उजाला
माना जाता है कि इस झील के तीनों कोनों में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी। एकादशी के दिन त्रिदेव यहां स्नान करते हैं। इस दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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