एम्स में इलाज की व्यवस्था की गई। पता चला कि उन्हें दुर्लभ और एग्रेसिव किस्म का कैंसर है। इलाज के दौरान उनके बारे में लोग हमसे से पूछते रहे और हम डॉक्टर से पूछते रहे। अमेरिका जाते समय मैंने उनसे कहा था, पंत जी, लड़ाई लड़नी है। हम सहयोग कर सकते हैं, लड़ना आपको है। आप फाइटर हैं। आप लड़िए। उनका जवाब था, मैं लड़ने को तैयार हूं। उन्होंने मुझे कहा कि मैं 88 वर्ष जिऊंगा।