कुपवाड़ा में शहीद उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी सूबेदार यमुना प्रसाद पनेरू की अंतिम विदाई में हर किसी की आंख भर आई। शहीद की पत्नी ममता ने पति को सैल्यूट कर अंतिम विदाई दी। वहीं, मां माहेश्वरी ने भी बेटे को प्यार से दुलारा। अंत्येष्टि के दौरान परिजन आखिरी बार शहीद को देख बिलख पड़े।
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- फोटो : अमर उजाला
आज रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर सैन्य सम्मान के साथ शहीद यमुना का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान शहीद के अंतिम दर्शन के लिए काफी लोग पहुंचेंगे। किसी की भावना आहत न हो लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान भी रखा गया।
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शहीद यमुना प्रसाद पनेरू अपनी बेटी साक्षी को डॉक्टर और बेटे यश को इंजीनियर बनाना चाहते थे। शहीद की मां महेश्वरी देवी ने कहा कि उनके बेटे ने बहुत महान काम किए हैं लेकिन अफसोस है कि वह नहीं लौटेगा।
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पत्नी ममता का भी रोते-रोते बुरा हाल था। उन्होंने तीन दिन से कुछ भी नहीं खाया है। बड़े भाई चंद्र प्रकाश पनेरू और छोटे भाई भुवन पनेरू भी फफकते हुए बोले कि देश की सेवा और पर्वतारोहण में उच्च शिखर को फतह करने के बाद भाई ने परिवार को मान ऊंचा कर दिया।
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पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी, केडी रूवाली, आन सिंह मटियाली आदि ने शहीद यमुना प्रसाद पनेरू के नाम पर ओखलकांडा ब्लॉक में पर्वतारोहण प्रशिक्षण केंद्र खुलवाने और पतलोट डिग्री कॉलेज का नाम सूबेदार शहीद यमुना प्रसाद पनेरू के नाम रखने की मांग की है।
शहीद यमुना का सपना पहाड़ के युवाओं को पर्वतारोहण के लिए तैयार कर कुशल पर्वतारोही बनाना था। इसके लिए वह एक प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहते थे। वे इसी महीने के अंत में घर भी आने वाले थे।