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Uttarakhand Lockdown: कहीं एक निवाले के लिए तरस रहे लोग और यहां ऐसे 'ठिकाने' लगाया जा रहा राशन, तस्वीरें...

Sun, 12 Apr 2020 07:56 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
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- फोटो : अमर उजाला
एक तरफ देश महामारी से जूझ रहा है और कई लोगों को एक वक्त का खाना नहीं मिल पा रहा है, लेकिन कुछ लोग इसकी आड़ में राशन की कालाबाजारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। रुड़की में खुफिया विभाग की सूचना पर एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने रविवार सुबह मंडी समिति में छापा मारकर राशन के 35 कट्टों से भरा टेंपो पकड़ लिया। वहीं, एक आढ़त के बाहर से भी 70 कट्टे बरामद हुए हैं।
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मामला पकड़ में न आए, इसके लिए कालाबाजारी करने वालों ने इन कट्टों से सरकारी सील खोलकर ऊपर से बांध दिया था। एसडीएम के अनुसार, इनमें से करीब 80 कट्टे सरकारी हैं, लेकिन इन पर सील नहीं लगी है। मंडी और पूर्ति निरीक्षक को मामले की विस्तृत जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। पिछले कई दिनों से प्रशासन को राशन की कालाबाजारी की शिकायतें मिल रही थीं।
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खुफिया विभाग कालाबाजारी करने वालों की धरपकड़ के लिए सक्रिय था। रविवार सुबह करीब छह बजे एलआईयू प्रभारी प्रदीप नेगी ने मंडी समिति में राशन से लदे एक टेंपो को पकड़ने के बाद एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान को सूचना दी। उन्होंने बताया कि टेंपो नन्हेड़ा से आया है, जिसमें 20 कट्टे गेहूं और 15 कट्टे चावल है। इनमें कुछ कट्टे सरकारी हैं, लेकिन उन पर सील नहीं थी।

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- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा एक आढ़त के बाहर से भी 70 सरकारी कट्टों में भरा राशन बरामद किया गया। इन पर भी सरकारी सील नहीं लगी है। लिहाजा जांच होने तक इन्हें सीधे तौर पर कालाबाजारी के रूप में पुष्ट करना संभव नहीं है, लेकिन यह साफ है कि चालाकी से सरकारी राशन को मंडी में बेचने लाया गया था। मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
राशन की कालाबाजारी की शिकायतों के मद्देनजर एलआईयू प्रभारी प्रदीप नेगी तीन दिनों से सुबह मंडी की रेकी कर रहे थे। रविवार को उन्हें सफलता मिल गई। इस दौरान उन्होंने न केवल एक टेंपो को पकड़ा बल्कि एक स्कूटी पर कई बोरा राशन लादकर पहुंचे व्यक्ति को भी पकड़ लिया। टेंपो में भरा राशन नन्हेड़ा से लाया गया था। इसलिए एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने यहां स्थित दो राशन डीलरों के स्टॉक के भौतिक सत्यापन के आदेश दिए हैं। 
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दरअसल, राशन डीलर कई पैंतरेबाजी कर लोगों के हक का राशन महंगे दामों में बाजारों में बेचते हैं। सूत्रों के अनुसार, हर गांव में दस से 15 प्रतिशत कार्डधारक है जो शहरों या अन्य प्रदेशों में शिफ्ट हो गए है, लेकिन उनके कार्ड के आधार पर राशन डीलर को सरकार से खाद्यान्न प्राप्त हो रहा है। प्रशासन के स्तर पर राशन डीलरों की ओर से प्रतिमाह बांटे जा रहे राशन का सत्यापन नहीं किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा राशन डीलर उठा रहे हैं।
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