मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे से पहले राज्य में मचे सियासी उथल-पुथल के बीच दिल्ली से लेकर राज्य तक बैठकें चल रही हैं। इन सबके बीच उत्तराखंड में मार्च की भी चर्चा हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मार्च में राज्य में पहले भी इस महीने में कई बार सियासी उथल-पुथल देखने को मिली है। 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ आई त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को कई बार राजनीतिक हलचल का सामना करना पड़ा। इससे पहले मार्च 2016 में भी हरीश रावत सरकार को गिराने का प्रयास किया गया था। फिर पिछले साल मार्च में ही विधायकों के एक समूह ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ विद्रोह किया था। फिर, पिछले साल मार्च में सीएम त्रिवेंद्र ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सबको आश्चर्य में डाल दिया, जिसके बाद हिमालयी राज्य में राजनीतिक बवाल मच गया है। इस साल भी यह मार्च का महीना ही है कि सीएम ने बजट सत्र के दौरान गैरसैंण को तीसरा मंडल घोषित कर दिया। इस मंडल में कुमाऊं और गढ़वाल के दो दो जिलों को सम्मिलित किया गया है। चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों को इस मंडल में सम्मिलित किया जाएगा। सीएम ने कहा कि गैरसैण में कमिश्नर और डीआईजी स्तर के अधिकारी बैठेंगे।