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चमोली आपदा: वैज्ञानिकों ने किया हवाई सर्वे, बताया ग्लेशियर नहीं बल्कि चट्टान टूटने से बनी झील से आई आपदा

Wed, 10 Feb 2021 08:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि रविवार को ऋषि गंगा में आई आपदा का कारण ग्लेशियर के नीचे की चट्टान टूटना है, जिसके बाद लटका (हैंगिंग) ग्लेशियर भी नीचे आ गया और वहां एक झील बन गई, जो तबाही का कारण बनी। अभी वहां 25 और ग्लेशियर ऐसे हैं जो लटके हुए हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी विभाग के दो वैज्ञानिकों ने बुधवार को यहां हवाई सर्वे किया और अपने शुरुआती आकलन में इस निष्कर्ष पर पहुंचे। 
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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
रविवार को आई आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक की जांच शुरू हो गई है। बुधवार को रैणी पहुंचे वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक मनीष मेहता और डा. विनीत कुमार ने बताया कि हवाई सर्वे में जो शुरुआती संकेत मिले हैं, उसके आधार पर चट्टान टूटने से यह आफत आई है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में 25 ग्लेशियर हैं जो लटके हुए हैं।
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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
आपदा के दौरान ऋषि गंगा के ऊपर चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटा, जिससे यहां लटका ग्लेशियर भी नीचे आ गया और एक झील बन गई। इस झील के टूटते ही पानी का सैलाब आ गया। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट से इसकी पूरी जानकारी मिल पाएगी, लेकिन प्रथम दृष्टया यही संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पानी के साथ आई मिट्टी, पत्थर, पेड़ों के सैंपल एकत्रित किए जा रहे हैं। इनका लैब में परीक्षण भी किया जाएगा।

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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
ऋषि गंगा में आई आपदा में रैणी ओर तपोवन से अभी तक तबाही की तस्वीरें आ रही थी। अब विष्णुप्रयाग में हुए नुकसान की भी तस्वीर सामने आई है। यहां पर बदरीनाथ जाने वाले पौराणिक पैदल मार्ग पर बना झूला पुल ध्वस्त हो गया है। यहां पर बना घाट मलबे में दब गया है और योग सेंटर को भी नुकसान हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रविवार सुबह दस बजे के करीब विष्णुप्रयाग में पानी पहुंच गया था।
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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
यहां पर अलकनंदा और धौली का संगम है। जब लोग बदरीनाथ पैदल जाते थे तो इसी पुल का प्रयोग करते थे। साथ ही आसपास कहीं सड़क मार्ग ध्वस्त होने पर इस पुल को आज भी यात्रियों को निकालने के लिए प्रयोग में लाया जाता था। वर्ष 2016 में हाथी पर्वत टूटने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया था। तब इसी पुल से यात्रियों को पैदल निकाला गया था। अब यह पुल ध्वस्त हो चुका है। यहां पर बना घाट मलबे में दब चुका है, जबकि करीब डेढ़ सौ मीटर ऊपर बने योग सेंटर को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
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