एक तरफ जहां चीन लगातार अपनी गीदड़ धमकी से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में लगा है। इधर, उत्तराखंड की बेटियों ने चीन को सबक सिखाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
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दोकलम विवाद से नाराज बहनों ने इस साल रक्षाबंधन पर चाइनीज राखियों का खुला बहिष्कार कर दिया है। भाईयों की कलाई पर इस साल केवल भारतीय राखियां ही सजेंगी। बाजार में चीनी राखियों की डिमांड में पहली बार भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
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भारत और चीन के बीच चल रही दोकलम विवाद का असर पूरी तरह से इस बार राखियों के बाजार पर नजर आ रहा है। हालांकि चाइनीज राखियां अपेक्षाकृत सस्ती हैं लेकिन बहनें इस बार इनके बहिष्कार पर उतर आई है।
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उनका कहना है कि चीन हमारे देश में घुसपैठ कर रहा है तो हम भला उसकी राखियां क्यूं खरीदें। चीन की दखल अंदाजी के बाद भारतीय बेटियों ने चीनी सामानों का बहिष्कार कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि जनभावना के कारण या फिर देशभक्ति की वजह से चीनी राखियां इस साल बाजार से गायब है। भारत में बनी राखियों से बाजार सजा हुआ है और उनकी ही अच्छी बिक्री भी हो रही है।
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कुछ दुकानदारों का कहना है कि इस बार बहनें राखी खरीदने से पहले एक बार ही नही कई बार पूछ रही है कि राखी चाइनीज तो नही है। कहां बनी और कहां से मंगवाई है, इसकी पूरी तसल्ली के बाद ही वह खरीदारी कर रही हैं।
एक दुकानदार हरीश भाटिया कहते हैं कि यह पहला मौका है जब बाजारों से तकरीबन पूरी तरह से चाइनीज राखियां गायब हैं। राखी खरीददार किसी कीमत पर चाइनीज राखी नहीं खरीदना चाहते हैं। उनका कहना है कि स्वदेशी राखी भले ही महंगी हो लेकिन वही खरीदेंगे।