जुनून तो जुनून होता है। यह कब और कैसे पैदा होता है। इसकी कहानियां अलग-अलग हो सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी दून निवासी गरिमा प्रेम की है। जिन्होंने मुंबई में कम समय के भीतर एक अलग मुकाम बनाया। गरिमा बतौर क्रिएटिव हेड कई सीरियलों और फिल्मों में काम कर रही हैं।
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garima prem
पापा ये सीरियल कौन बनाता है...। मुझे भी बड़े होकर सीरियल बनाने हैं...। बचपन में अक्सर गरिमा प्रेम अपने पिता राजेश
गुलाटी से इस तरह के सवाल पूछती थीं। पर तब शायद उन्हें भी यह अहसास नहीं होगा कि उनकी बेटी एक दिन अपने सपने
को साकार करेगी।
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गरिमा ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि 2011 में जब वह मुंबई पहुंची तो काफी स्ट्रगल करना पड़ा। बकौल गरिमा कई बार तो ऐसी नौबत आई कि लगा सपना सपना रह जाएगा। पर हिम्मत नहीं हारी। पहला मौका शशि सुमित प्रोडक्शन के रूप में मिला। बतौर एसोसिएट क्रिएटिव हेड लाइफ ओके के साथ ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में काम किया। इसके बाद डायरेक्टर्स कट प्रोडक्शन के साथ अमृत मंथन किया।
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‘गुमराह’, ‘मेरी आशिकी तुम से ही’ में काम करने का मौका मिला। काफी कुछ सीखने को मिला। 2012 में क्रिएटिव हेड के तौर पर बाला जी टेलीफिल्मस के साथ करीब तीन साल तक गुमराह सीरीज की। जो चैनल वी का काफी पापुलर शो था।
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इसके बाद 2015 में कलर्स में एकता कपूर ने फिर मौका दिया। ‘मेरी आशिकी तुमसे ही’ में किए काम को उन्होंने खूब सराहा। जिसके चलते उन्होंने मुझे बालाजी मोशन मूवी के तहत बनने वाली ‘फ्लाइंग जट’ फिल्म में क्रिएटिव हेड के तौर पर काम सौंपा।
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फिलहाल एंड टीवी में बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर ‘वारिस’ और ‘होशियार-सही वक्त सही कदम’ में काम कर रही हूं। उन्होंने कहा कि लड़कियों को कभी भी कम नहीं समझना चाहिए। अगर वे आगे बढ़ना चाहती हैं तो परिवार को उनका पूरा सपोर्ट करना चाहिए। जैसे मेरे परिवार ने मुझे सपोर्ट किया।
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गरीमा ने बताया कि मेरी पढ़ाई सेंट जोसफ स्कूल में हुई है। यह मेरी जन्मभूमि है। इससे मुझे बहुत लगाव है। यही कारण है कि जब भी मौका मिलता है, देहरादून के नाम आगे लाते हैं। ‘होशियार-सही वक्त सही कदम’ के दो एपिसोड की शूटिंग मसूरी में की है। आगे जब भी अवसर मिलेगा, देहरादून आएंगे। देहरादून की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगी।
गरिमा बताती हैं कि उनका लक्ष्य अच्छे शो बनाना है। जिससे लोग जागरूक हो सकें। बताया कि वर्तमान में चल रहे शो वारिस में जहां लिंग असमानता के मुद्दे पर प्रकाश डाला गया है। वहीं, ‘होशियार-सही वक्त सही कदम’ में हम यही सीख देते हैं कि सही समय पर सही कदम उठाने से अपराध को रोका जा सकता है।