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...जब पंत खुद किचन में जाकर बनाने लगे चाय, उनकी सादी जिदंगी के हैं ऐसे कई उदाहरण, पढ़ें

Fri, 07 Jun 2019 08:42 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विपिन बनियाल, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
पंत की सादगी के कई उदाहरण हैं। एक दिन किचन में जाकर चाय बनाने की बात सहज विश्वास करने लायक नहीं है।
 
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- फोटो : फाइल फोटो
दरअसल, रात को वह अपने निवास पर किसी फॉलोवर को नहीं रखते थे। एक दिन, सत्र के दौरान वह बगल वाले कमरे में आए और मीडियाकर्मियों को नींद से जगाया। बोले-आप लोग चाय लेंगे। उन्होंने संकुचाते हुए हां कहा, तो वह चले गए। वह यही सोच रहे थे कि कोई फॉलोवर आ गया होगा और वह चाय बना रहा होगा। फिर भी वह उत्सुकता वश किचन में पहुंचे, तो वहां प्रकाश पंत चाय बना रहे थे। यह स्थिति प्रकाश पंत की सादगी से जुड़ी उत्कृष्ट मिसाल के दर्शन कराने वाली भी।
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- फोटो : फाइल फोटो
प्रकाश पंत की व्यवहार कुशलता और अच्छे स्वभाव की वजह से मंत्री और विधायकों का सत्र के दौरान उनके घर पर आना जाना हर समय देखने को मिला। डॉ. हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल के बीच हंसी ठिठोली और वाद विवाद के बीच प्रकाश पंत हर बार बड़ी सूझबूझ से बात संभालते हुए दिखते। अफसरों के साथ गहन मंथन, लंबी बैठक के सत्र के दौरान कई बार दर्शन हुए। उन्हें किसी पर नाराज होते या चिल्लाते देखने की तो कभी स्थिति ही नहीं आई। अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार विपिन बनियाल ने बजट 2018 को लेकर प्रकाश पंत से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
 

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- फोटो : फाइल फोटो
दिन-21 मार्च 2018 बुधवार, स्थान-गैरसैंण में मंत्री आवास। समय-साढे़ आठ बजे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत डिनर के लिए तैयार हैं। हम तीन पत्रकार उनके साथ हैं। हमे चिंता है कि अगले दिन 22 मार्च को बजट की कवरेज किस तरह करेंगे। क्या प्लानिंग होगी। इसके विपरीत, दूसरी खाने की टेबल पर प्रकाश पंत हैं, जिन्हें बजट पेश करना है। मगर चिंता के लिए उनके चेहरे पर कोई जगह नहीं है। वह शांत चित्त हैं। अपनी तैयारी को लेकर आश्वस्त हैं।
 
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- फोटो : फाइल फोटो
रात के नौ बजे वह सोने के लिए अपने कमरे में चले जाते हैं। इसके बाद, सुबह पांच बजे उठते हैं। पूजा-अर्चना करते हैं। पंडित प्रकाश पंत के माथे पर बड़ा तिलक उनकी धार्मिक निष्ठा के दर्शन करा रहा है। सुबह नाश्ते की टेबल पर हम फिर उनके साथ हैं। अब भी उतने ही आश्वस्त, उतने ही शांत। शाम को चार बजे प्रकाश पंत सदन में आते हैं और प्रभावी ढंग से बजट पेश करते हैं। सत्र में पूरे दिन के नायक प्रकाश पंत ही रहते हैं।
 
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- फोटो : फाइल फोटो
2018 के विधानसभा सत्र के दौरान एक सप्ताह प्रकाश पंत को जानने-समझने का न सिर्फ मुझे, बल्कि मेरे सहयोगी पत्रकार राकेश खंडूड़ी और अरविंद शेखर को भी मौका मिला। यह प्रकाश पंत की सहृदयता ही थी कि उन्होंने अपने आवास में हमारे लिए रहने की व्यवस्था की थी। इसकी वजह थी। दरअसल, पत्रकारों के रहने की जहां व्यवस्था थी, वो स्थान विधान भवन से काफी दूर था। इसके अलावा नेटवर्क की समस्या समाचार भेजने की राह में अड़चन थी।
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- फोटो : फाइल फोटो
पंत ने हम लोगों से कहा-आप अन्यथा न लें, तो मेरे सरकारी आवास में एक कमरा है। वहां रहकर कवरेज करना आप लोगों के लिए ज्यादा सुविधाजनक होगा। हमने उनका यह प्रस्ताव स्वीकार किया, तो पता चला कि प्रकाश पंत होना वास्तव में क्या है। पूरे सत्र में प्रकाश पंत सरकार के संकटमोचक रहे। उनके साथी मंत्री हों या फिर विपक्ष के धुरंधर, उनकी रणनीति रात में तैयार होती। देर रात तक गैरसैंण के ठंडे मौसम में राजनीति की गर्म बातें होती, मगर प्रकाश पंत की अपनी जो दिनचर्या थी, उसमें रत्ती भर इधर से उधर न होता।
 
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वित्त मंत्री प्रकाश पंत(कोट में) - फोटो : फाइल फोटो
वह दिन भर जुटकर कार्य करते और रात नौ बजे सोने चले जाते। सुबह पांच बजे उठते और फिर आराम नहीं करते। रात की राजनीति से हमेशा किनारा करने वाले प्रकाश पंत इसकी वजह भी साफ करते थे। उन्होंने एक दिन बताया-मैं पिथौरागढ़ क्षेत्र का विधायक हूं। वहां सब नौ बजे सो जाते हैं। चुनाव भी हो, तो रात की कोई उपयोगिता नहीं। इसलिए अपनी दिनचर्या में ये शामिल है कि दिन में खूब काम करो, रात को जल्दी सो जाओ और सुबह जल्दी उठ जाओ।
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