वित्त मंत्री प्रकाश पंत
तब किसी ने भी नहीं सोचा था कि उनके फेफड़ों में एक ऐसा रोग दाखिल हो चुका है, जो उनके प्राणों को हर लेगा। लेकिन सच्चाई यही है कि सज्जन, मृदभाषी और कवि हृदय प्रकाश पंत अब हमारे बीच नहीं रहे। बजट भाषण में जो चार पंक्तियां उन्होंने लिखी, वे उनके व्यक्तित्व का आइना बन गई। जिन्हें उनका सानिध्य प्राप्त हुआ है, वे उनके राजनीतिक संघर्ष को जानते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में पंत फार्मासिस्ट से राजनीति में आए और अपनी काबलियत के दम पर संसदीय, विधायी और वित्त सरीखे मंत्रालय के मंत्री बनें।