कोरोना के साये में हुआ उत्तराखंड का विधानसभा चुनाव इस बार कई मायनों में यादगार रहेगा। नेताओं की बदजुबानी से लेकर धार्मिक तुष्टिकरण तक की कोशिशें भी खूब हुई। ये प्रदेश का ऐसा पहला विधानसभा चुनाव रहा, जिसमें हरक सिंह रावत नही लड़े।
चुनाव से ठीक पहले हरिद्वार में हुई धर्म संसद से बदला राजनीतिक माहौल चुनाव नजदीक आने के साथ करवटें बदलता चला गया। जैसे-जैसे चुनाव निर्णायक दौर में पहुंचा, भाजपा ने तुष्टिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस को असहज करने की कोशिश की। कांग्रेस ने भी तीन-तीन मुख्यमंत्री बदलने को लेकर बनाए गए तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा मुद्दे से भाजपा को घेरने का प्रयास किया। आम आदमी पार्टी ने भी आध्यात्मिक राजधानी से लेकर मुफ्त बिजली गारंटी की भी सियासत की। चुनाव में भाजपा ने आखिर में ध्रुवीकरण का दांव चला।