उत्तराखंड की संस्कृति के रंग में रंगे जर्मनी के लुकस ने जब हाथ में ढोल-दमाऊं पकड़ा तो हर कोई उसका कायल हो गया। लुकस ने ऐसा ढोल बजाया कि वहां मौजूद हर शख्स देखता रह गया।
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गढ़वाल विवि में मानव विज्ञान विभाग के शोधार्थी जर्मन निवासी लुकास ने ढोल पर शानदार थाप देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। रविवार को उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर ढोल-दमाऊं के संरक्षण के लिए सुरीरा परिवार की पहल पर रविवार को इंटर कॉलेज अखोड़ी में ढोल-दमाऊं वादन की प्रतियोगिता आयोजित की गई।
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इस दौरान वह वहां आ आए और ढोल बजाया। प्रतियोगिता में टिहरी, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जिले की 18 टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में पौड़ी के देवेंद्र कुमार और राकेश कुमार प्रथम रहे। विजेता प्रतिभागियों को आयोजक मंडल की ओर से नगद पुरस्कार और ट्राफी देकर सम्मानित किया गया।
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उत्तराखंड के गांधी स्व. इंद्रमणि बड़ोनी के गांव अखोड़ी में सुशील सुरीरा और पीडी सुरीरा की पहल पर ढोल-दमाऊं वादन की प्रतियोगिता आयोजित की गई। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष सोना सजवाण ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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कहा कि पहाड़ की संस्कृति बचाने के लिए ऐसे आयोजन सराहनीय है। क्षेत्र के लोगों को जिला पंचायत की उपलब्धियों की जानकारी दी। विद्या विशेषज्ञ में प्रो. डीआर पुरोहित, डा. राकेश भट्ट, ओमकार दास, शिव प्रसाद सुरीरा व शिवजनी दास शामिल रहे।
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प्रतियोगिता में पौड़ी के सहदेव कुमार व संतोष कुमार द्वितीय रहे। भिलंगना के सुरेश सिराज और सतीश तृतीय रहे। प्रथम विजेता को आयोजक मंडल की ओर से 15 हजार, द्वितीय टीम को 7500, तृतीय को 3100 का नगद पुरस्कार तथा ट्राफी दी जाएगा। अन्य सभी टीमों को 1100 रुपये का नगद सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख विजय गुनसोला, जिला पंचायत सदस्य केदार, धनी लाल शाह, प्रीतम सुरीरा, कैलाश डंगवाल, डा. नरेंद्र डंगवाल, कैलाश मेहरा, गिरीश बड़ोनी, प्रधान सरोप सिंह मेहरा, विक्रम कुंवर, महावीर प्रसाद बड़ोनी आदि उपस्थित रहे।