बेटे की आदत सुधार नहीं पाने के गुस्से ने देवदत्त को पत्थर दिल बना दिया और उसने अंकित को मार दिया। सुहाग के हाथों कलेजे के टुकड़े की हत्या ने आरती को अंदर तक तोड़ दिया है। घर चलाने के लिए ओवरटाइम करने के बाद कमाए रुपये चोरी होने और इस वजह से आए दिन घर में होने वाले क्लेश ने देवदत्त को बेटे का ही हत्यारा बना दिया।
चार साल से देवदत्त परिवार के साथ आजादनगर में रह रहा था। करीब डेढ़ महीने से उसका भतीजा अभिषेक भी उनके साथ आकर रहने लगा। वह भी एक कंपनी में काम करता था। देवदत्त सिडकुल की एक कंपनी में डाईमशीन चलाने का काम करता था। उसने पुलिस को बताया कि ड्यूटी करने के बाद उसको 12 हजार रुपये वेतन मिलता था। इससे घर का खर्च नहीं चल पाता था। इस वजह से वह कंपनी में ओवरटाइम करता था और इससे उसे छह हजार रुपये मिल जाते थे। वह किसी तरह घर का गुजर-बसर कर रहा था।
बताया कि छठी कक्षा में पढ़ने वाला 14 साल का उसका बड़ा बेटा अंकित दो साल से घर में चोरी कर रहा था। रुपये चोरी होने के बाद अक्सर घर में क्लेश होता था। एक बार अंकित ने घर के बक्से का ताला तोड़कर रुपये चुरा लिए थे। वह कई बार बेटे को समझा चुका था लेकिन उसने हरकतें बंद नहीं कीं।
इस बार अंकित ने दस हजार रुपये चुराए। इस पर मंगलवार को घर में झगड़ा हुआ था। इसी से परेशान होकर उसने अंकित को खत्म करने की योजना बनाई। उसके चेहरे पर अपने किए पर पछतावे का शिकन नहीं था। एसपी क्राइम निहारिका तोमर ने कहा कि अभियुक्त देवदत्त बार-बार बयान बदलता रहा था। उसे कमाई के रुपये चोरी होने का गुस्सा था और उसने बेटे की हत्या कर दी।
Rudrapur: अंकित हत्याकांड का खुलासा, पिता ही निकला कातिल, बेटे की चोरी की आदत और शैतानियों से था परेशान