चमोली जिले के सीमांत गांव रैणी में ग्लेशियर टूटने और उससे उपजे जलप्रलय ने 16 जून 2013 की केदारनाथ आपदा के जख्मों की याद दिला दी। लेकिन इस बार कुदरत ने कुछ रहम किया कि यह घटना मूसलाधार बारिश के बीच घुप अंधेरी रात में नहीं हुई। सुबह की घटना, साफ मौसम और प्रचंड आपदा से सबक सीखे सिस्टम ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। बाढ़ से उपजे हालातों को अफवाहों के चंगुल से बचाते हुए पल-पल की सूचना पब्लिक डोमेन पर साझा की गई और शाम होने तक बाढ़ से सहमे अलकनंदा और गंगा नदी के तटवर्ती शहरों, कस्बों और नगरों के लोगों ने राहत की सांस ली।