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Uttarakhand Glacier Burst: आंखों के सामने सैलाब में समा गए अपने, खौफजदा ग्रामीणों ने जंगल में बिताई रात

Mon, 08 Feb 2021 09:16 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली)
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चमोली आपदा से खौफ में ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
हमेशा शांत बहने वाली ऋषिगंगा के रौद्र रूप को देख ग्रामीण खौफजदा हैं। रैणी वल्ला, रैणी पल्ला और जुग्जु गांव के ग्रामीणों के 120 परिवार नदी के सैलाब से इतना डर गए कि वे रात में भी अपने घरों में नहीं गए। उन्होंने रविवार की रात जंगलों में टेंट लगाकर बिताई। सोमवार को भी दिनभर अपने गांव में रहने के बाद ग्रामीण रात को टेंटों में चले गए।
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चमोली आपदा से खौफ में ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों को ग्लेशियरों के बीच से फिर पानी का सैलाब आने की आशंका है। रैणी गांव के मुरली सिंह और पूरण सिंह का कहना है कि ऋषिगंगा की बाढ़ से रैणी गांव भी पूरी तरह खतरे की जद में आ गया था, लेकिन गांव के ठीक सामने चट्टान ने सैलाब का रुख मोड़ दिया, जिससे गांव तो बच गया, लेकिन अभी भी सैलाब को देख सदमे में हैं।
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चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला
छुमा देवी, रमा देवी, श्यामा देवी और अषाड़ी देवी ने कहा कि ऐसी जलप्रलय पहली बार देखी। हमें घरों में भी भय लग रहा है। हम एक रात भी अपने घरों में बिताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि फिर कोई ऐसा सैलाब न आ जाए, जो गांव को ही बहा ले जाए। गांव के गुड्डू राणा का कहना है कि जलप्रलय के बाद से लोग सकते में हैं। 

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chamoli disaster - फोटो : amar ujala
आपदा में रैणी और आसपास गांव के पांच लोग बह गए, जिसमें किसी ने बेटा खो दिया तो किसी की आंखों के सामने उसका भाई ऋषिगंगा में समा गया। बुजुर्ग दादी भागकर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच पाई और देखते ही देखते नजरों से ओझल हो गईं। रैणी सहित आसपास के गांवों में मातम छाया हुआ है। परिजनों ने भरी आंखों से उस मंजर को बयां किया जब वह देखते रह गए और उनके सामने परिजन नदी की आगोश में चले गए।
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आपदा के बाद रैणी गांव - फोटो : अमर उजाला
रविवार को ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ ने रैणी गांव को कभी न भूलने वाले जख्म दे दिए। रैणी गांव के गौरव सिंह ने डबडबाती आवाज में बताया कि वह अपनी दादी अमृता देवी (72) के साथ पुल के पास खेत में काम कर रहे थे। अचानक से नदी में उफान आया तो वह कुछ समझ नहीं पाए। वह वहां से भाग गया लेकिन बुजुर्ग दादी तेज नहीं भाग पाई और मेरी नजरों के सामने नदी में समा गई। 
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चमोली आपदा में व्यक्ति को बचाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
देवेंद्र सिंह ने बताया कि वह अपने भाई संजय सिंह (28 साल) के साथ नदी किनारे बकरी चरा रहे थे। नदी के उफान को देखकर दोनों भागे लेकिन उसका भाई संजय नदी में आ गया। रैणी पल्ली गांव के दरबान सिंह का बेटा यशपाल (31 साल) शिवालय के निकट बकरी चुगा रहा था। नदी की बाढ़ के बाद से वह भी लापता है। जुगजू के पंज ने बताया कि उसकी मां माघी देवी (45 साल) काली मंदिर के पास घाट काट रही थी और देखते ही देखते नदी में बह गई। 
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चमोली में आपदा - फोटो : अमर उजाला
रैणी के खीम सिंह का 28 वर्षीय पुत्र रणजी सिंह कंपनी में काम करता था और वह रविवार से लापता है। चोरमी गांव का मंजीत रावत कंपनी में काम करता था, लेकिन उसका भी कुछ पता नहीं है। उसके परिजन अजीतपाल रावत, शरद सिंह, अनुज सुबह ही तपोवन पहुंच गए थे, लेकिन शाम तक मंजीत का कुछ पता नहीं लगा। शाम होने के बाद से परिजनों में उनके मिलने की आस भी खत्म होती जा रही थी। तपोवन के अमित डोभाल भी लापता हैं। उनके परिजन रमेश डोभाल, दिनेश डोभाल, सुभाष थपलियाल पूरे दिन भी अमित को तलाशते रहे। जब उनका कुछ पता नहीं लगा तो अंधेरा होने पर वह हताश होकर लौट गए।
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