उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में पाई जाने वाली देसी नस्ल की गाय ‘बद्री’ ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएजीआर) ने बद्री गाय को सूचीबद्ध कर दिया है। उत्तराखंड में भैंस और गायों में बद्री गाय पहला ऐसा दुधारू जानवर है, जिसे एनबीएजीआर ने ब्रीड की श्रेणी में शामिल किया है। पशुपालन विभाग के अफसर इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
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uttarakhand badri cow in NBAGR list
पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो देशभर में गाय की 37 प्रजातियां पाई जाती हैं। जिसमें साहीवाल, थार पारकर, गिर, रेड सिंधी, कानक्रेज, हरियाणा, ओंगोल, जैसी गायों की कुछ प्रजातियां प्रमुख हैं।
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इनमें कुछ प्रजातियां उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में पाई जाती हैं। लेकिन राज्य के पर्वतीय इलाकों में पाई जाने वाली बद्री गाय का कोई वजूद इन गायों के सामने नहीं था। लेकिन अब बद्री गाय भी तमाम देसी विदेशी गायों की नस्ल की जमात में शामिल हो गई है।
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पहाड़ की आर्थिकी में अहम रोल निभाने वाली ‘बद्री’ गाय को ब्रीड का दर्जा दे दिया गया है। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. एसएस बिष्ट का कहना है कि यह न सिर्फ पशुपालन विभाग बल्कि पूरे राज्य के लिए हर्ष का विषय है। बद्री गाय का नेशनल ब्यूरो ऑफ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएजीआर) की सूची में शामिल होना यह दर्शाता है कि इस गाय की कितनी उपयोगिता है।
बद्री गाय वैसे तो साहीवाल, थार पारकर, गिर, रेड सिंधी, कानक्रेज, हरियाणा, ओंगोल, जैसी गायों की तुलना में दूध कम ही देती है, लेकिन पहाड़ों के वातावरण के हिसाब से जहां अन्य गायों को पालना आसान नहीं होता, वहीं यह ज्यादा कारगर साबित होती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इसकी प्रजनन क्षमता भी अन्य गायों की तुलना में ज्यादा है।