जूते-चप्पल की फड़ लगाने वाले रामपाल की बेटी काजल ने उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं कक्षा में प्रदेश टॉप किया तो घर में खुशियों की लहर दौड़ गई। 95.20 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली इस छात्रा का कहना है परिवार की माली हालत के चलते उसने ट्यूशन नहीं लगाई।
विज्ञापन
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
2 of 8
अधिक से अधिक समय वह पढ़ाई को दे सके इसके लिए वह फेसबुक और व्हाट्सएप से भी दूर रही। टेलीविजन भी वह समाचार देखने के लिए खोलती हैं। जब इतनी बड़ी खुशखबरी घर में मिली तो मां और मामी ने बेटी को गले लगा लिया।
विज्ञापन
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
3 of 8
ज्वालापुर (हरिद्वार) के मोहल्ला मालियान, गांधी मार्किट निवासी काजल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज सेक्टर-2 भेल की छात्रा है। उसके पिता अपने घर में जूते-चप्पल बनाकर साप्ताहिक बाजार बंदी के दौरान लगने वाली पीठ में बेचते हैं। इस काम में काजल एवं उसका बड़ा भाई भी पूरी मदद करते हैं।
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
4 of 8
वह अपने पिता के काम को बिलकुल भी छोटा नहीं मानती, उसका कहना है जिस काम से परिवार का पेट पलता हो उस काम को सभी को रुचि से करना चाहिए। बेहद तंग गली में 15 बाई 8 के छोटे से मकान में रहने वाली काजल ने बताया कि छोटा घर होने के चलते जब उसे पढ़ाई में परेशानी हुई तो तीन महीने (जनवरी, फरवरी और मार्च) के लिए उसने एकांत में किराए का कमरा लेकर पढ़ाई की। जब पढ़ाई का खर्चा बढ़ा तो मां अलका ने भी सिडकुल में नौकरी करनी शुरू की।
विज्ञापन
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
5 of 8
उसके बाद स्कूल से आते ही वह कमरे में पढ़ाई में जुट जाती थी। उसने बताया कि उसे यह तो विश्वास था कि कालेज टॉप करेगी, लेकिन प्रदेश में भी प्रथम स्थान मिलेगा, विश्वास नहीं था। विषम परिस्थितियों में पली बढ़ी काजल की प्रथम इच्छा इंजीनियर और दूसरी इच्छा पायलट बनने की है। उसने जेईई मेंस का एग्जाम भी दिया है। हाईस्कूल की प्रदेश की मेरिट सूची में काजल ने 19वां स्थान प्राप्त कर सरकार ने उसे वर्ष 2013 में एक टैबलेट दिया है।
विज्ञापन
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
6 of 8
काजल का कहना है कि उसे परिजनों ने बताया था कि अखबार में एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें औरंगाबाद निवासी किसान की बेटी अनुराधा आईएएस बनी है। उसके बाद उसने ठान ली है जब दूध बेचकर परिवार का पालनपोषण करने वाली की बेटी इतनी बढ़ी अधिकारी बन सकती है तो वह क्यों नहीं। अनुराधा वर्ष 2013 में सिविल सर्विस के लिए चयनित हुई थी।
विज्ञापन
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
7 of 8
काजल की सफलता पर काजल के पिता रामपाल और माता अलका देवी की खुशी का ठिकाना नहीं है। कॉलेज के बाद जब वह घर पहुंचे तो आसपास के लोगों में भी खुशी का माहौल था। सभी उसे बधाई देने पहुंचे। उसके दादा केसुराम, दादी रानी, भाई रमनदीप सहित अन्य परिजन बच्ची की सफलता से बेहद खुश हैं।
फड़ लगाने वाले की बेटी बनी उत्तराखंड बोर्ड टॉपर, पढ़िए कहानी
8 of 8
काजल ने बताया कि वह सुबह सवा 11 बजे रानीपुर मोड़ से थ्रीव्हीलर से घर आ रही थी। उसी बीच कॉलेज प्रधानाचार्य ने फोन पर बताया कि उसने प्रदेश टॉप किया है। लेकिन विश्वास नहीं हुआ। उसके बाद सरस्वती विद्या मंदिर भेल में बुलाकर सम्मानित किया। प्रधानाचार्य उदयराज सिंह चौहान, एससीसी समन्वयक पंकज शर्मा सहित सभी स्टाफ ने उसे बधाई दी। इसके बाद काजल घर पहुंची तो वहां बधाई देने वाले आसपड़ोस के लोग एकत्रित थे।