मसूरी का नाम तो आपने सुना ही होगा। दुनियाभर में प्रसद्घि मसूरी अपनी खूबसूरती और मनमोहक नजारों के लिए जानी जाती है। लेकिन मूसरी के नाम के पीछे छिपी ये कहानी आप नहीं जानते होंगे।
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- फोटो : amarujala
कहते हैं कि मसूरी को 1800 सदी में ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी ने अपने एक साथी के साथ खोजा था। उन्ळोंने इसे छुट्टी बिताने के लिए माकूल जगह समझा और डेरा जमा लिया। इसके बाद उन्होंने देखा कि यहां पर मसूर के पेड़ बहुतायत में मिलता है। इसके बाद उन्होंने ही यहां का नाम मसूरी सर दिया।
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मसूरी में घूमने के लिए कई सुंदर जगह हैं। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए भी परफेक्ट जगह है। यहां का सबसे सटीक प्वाइंट है गन हिल। कहा जाता है कि कि आजादी से पहले इस पहाड़ी के ऊपर रखी तोप से रोजाना दोपहर के वक्त गोली चलाई जाती थी। जिससे लोग अपनी घड़ियां मिलाते थे। इसके कारण ही इसका नाम गनहिल पड़ा।
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यहां कुलरी बाजार से शुरु होने वाली यह रोड लाइब्रेरी बाजार पर जाकर खत्म होती है। यह जगह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए फेमस है। यहां से एक पहाड़ी दिखाई देती है जो बैठे हुए ऊंट की तरह दिखाई देती है।
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- फोटो : amarujala
म्यूनिसिपल गार्डन एक खूबसूरत बगीचा है जो मसूरी की हैप्पी वैली में स्थित है।इस गार्डन में 800 अलग - अलग प्रकार के फूल भी होते हैं जो नर्सरी में लगे हुए हैं, इन फूलों को बेचने के उद्देश्य से लगाया गया है। एक विशाल चाइना पेड़ भी यहां स्थित है।
यहां पर वैक्स म्यूजियम भी है। जिसमे गांधी जी, माइकल जेक्सन, अमिताभ बच्चन, मिस्टर बीन समेत अन्य कई बड़े कलाकारों के भी मोम के पुतले बने हैं। जो देखने में एक दम हुबहू लगते हैं।