उत्तराखंड के प्रथम दो तीर्थ गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया के पर्व पर शुक्रवार को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सैकड़ों श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने। लेकिन यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया को ही क्यों खुलते हैं इसके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं। तो चलिए हम आपको इसके बारे में बताते हैं।
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अक्षय यानी जो कभी क्षय(समाप्त) न हो। ब्रहमांड में बहुत सारे नक्षत्र हैं जो जब अपनी स्थिति बदलते हैं तो हमारे जीवन पर उनका उसी तरह से असर होता है।
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लेकिन साल में एक दिन ऐसा होता है जिस दिन अगर कुछ भी काम किया जाए तो वह अशुभ नहीं होता है। वह है बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि। इस दिन सारे काम सिद्घ होते हैं।
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यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन उनियाल के अनुसार यमुनोत्री धाम का सीधा संबन्ध यमुना से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यमुना सूर्य की पुत्री है। शनि और यम भी सूर्य के पुत्र हैं।
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किंदवंतियों के अनुसार हनुमान भी यमुना को अपनी बहन मानते थे। सदियों पहले यमुना जी ने तीनों भाईयों से एक साथ मिलने की इच्छा जताई। इस पर विचार कर तीनों भाई अक्षय तृतीय के दिन अपनी बहन यमुना से मिलने आए। वहीं वे गंगा से भी मिले।
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इस पर तीनों प्रतापी भाईयों ने घर लौटते वक्त अपनी बहन को वरदान दिया कि तीर्थों में सबसे पहले यमुना की पूजा होगी। इस दिन जो भी यमुनोत्री धाम आकर दर्शन करेगा उसके सभी पाप नष्ट होंगे।
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yamunotri dham
- फोटो : AmarUjala
इसके बाद यम शनि और हनुमान वापस चले गए और भाई दूज के दिन वापस आए। बहन से भेंट कर यमुना के भेंट स्वरूप कुछ मांगने पर तीनों भाईयों ने कहा कि आज से अक्षय तृतीय के दिन से भाई दूज तक जो भी यमुनोत्री धाम से इलाहबाद तक किसी भी तट पर यमुना में स्नान करेगा यम उसकी मृत्यु को टाल देगा।
वहीं शनि भी उस व्यक्ति को साढ़े सती के प्रकोप से दूर रखेगा । हनुमान जी ने कहा कि यमुना के धाम आने पर उस व्यक्ति के मैं सारे कष्ट हर लूंगा। बस इसके बाद से ही सबसे पहले यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाते हैं।