शनिवार को नागथात में हुए बस हादसे के बाद जब लोगों ने घायलों को निकालने के लिए 108 को फोन किया तो वह समय से नहीं पहुंची। इस पर लोगों ने खुद ही घायलों को बाहर निकालना शुरु कर दिया।
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दुर्घटना के घायलों को ग्रामीणों ने आनन-फानन में निजी वाहनों से लेहमन अस्पताल भिजवाया। जहां हालत गंभीर होने पर सात घायलों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
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लेकिन वहां 108 एंबुलेंस और अन्य सरकारी वाहन उपलब्ध न होने पर लोगों ने जमकर हंगामा काटा। लोगों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई।
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एसडीएम कालसी प्रत्यूश सिंह और एसपी देहात श्वेता चौबे ने गुस्साए लोगों को समझा-बुझा कर शांत किया। कालसी ब्लॉक के प्रधान संगठन अध्यक्ष चरण सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन को दुर्घटना की जानकारी देने के बावजूद अस्पताल से घायलों को हायर सेंटर रेफर करने के लिए वाहनों की कोई व्यवस्था नहीं थी।
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पीड़ितों के परिजनों को ही आनन-फानन में निजी वाहनों की व्यवस्था करनी पड़ी। आरोप लगाया कि घटना स्थल पर न तो 108 एंबुलेंस सेवा पहुंची और न ही कोई अन्य सरकारी वाहन।
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ऐसे में लोगों को निजी वाहन से घायलों को हायर सेंटर करना पड़ा। जिसके चलते मरीजों की जान पर बनी रही। कहा हर बार कोई बड़ी दुर्घटना होने पर आपदा प्रबंधन पूरी तरह से फेल साबित होता है।
दुर्घटना स्थल कालसी ब्लॉक मुख्यालय से 40 किमी दूर है। लेकिन वहां पर भी समय पर कोई शासन-प्रशासन का नुमाइंदा नहीं पहुंचा। कहा शासन-प्रशासन को भी दुर्घटना के करीब आधा घंटे बाद मीडिया कर्मियों के माध्यम से जानकारी मिली।