उत्तराखंड में कई मंदिर हैं जहां भगवान शिव की आराधाना के लिए लोग जाते हैं। ग्याराह ज्योर्तिलिंगों में भगवान शिव के किसी न किसी अंग की पूजा होती है। लेकिन उत्तराखंड में एक मंदिर है जहां भगवान शिव के दिल की पूजा होती है।
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तुंगनाथ मन्दिर उत्तराखंड के गढ़वाल के चमोली ज़िले में स्थित है। हिमालय की ख़ूबसूरत प्राकृतिक सुन्दरता के बीच बना यह मन्दिर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
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इस मन्दिर से जुडी एक मान्यता है कि यहाँ पर भगवान शिव के हृदय और उनकी भुजाओं की पूजा होती है। इसलिए यहां कोई भी मन्नत मांगी जाए तो भगवान जरूर पूरी करते है।
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एक और मान्यता के अनुसार भगवान राम ने जब रावण का वध किया, तब स्वयं को ब्रह्माहत्या के शाप से मुक्त करने के लिये उन्होंने यहाँ शिव की तपस्या की। तभी से इस स्थान का नाम 'चंद्रशिला' भी प्रसिद्ध हो गया।
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इस दौरान भगभान शिव के कई प्राचीन मन्दिरों के दर्शन भी होते हैं। यहाँ से डेढ़ किलोमीटर की ऊँचाई चढ़ने के बाद 'मून माउंटेन' के नाम से प्रसिद्ध
'चंद्रशिला' नामक चोटी के दर्शन होते हैं।
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मन्दिर स्वयं में कई कथाओं को अपने में समेटे हुए है। माना जाता है कि जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पांडवों के हाथों काफ़ी बड़ी संख्या में नरसंहार हुआ, तो इससे भगवान शिव पांडवों से रुष्ट हो गये। भगवान शिव को मनाने व प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने इस मन्दिर का निर्माण कराया।
इस मन्दिर की पूजा का दायित्व यहाँ के एक स्थानीय व्यक्ति को है। समुद्रतल से इस मन्दिर की ऊंचाई काफ़ी अधिक है, यही कारण है कि इस मन्दिर के सामने पहाडों पर सदा बर्फ जमी रहती है।