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कभी इस खिलाड़ी को क्रिकेट के लिए पड़ती थी डांट, आज लाडले की जीत पर भावुक दादी जानिए क्या बोलीं

Sun, 04 Feb 2018 04:19 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, हल्द्वानी
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kamlesh nagarkoti
अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में अपने शानदार प्रदर्शन से लाखों दिलों में बस चुके इस खिलाड़ी की कहानी पढ़िए उनकी आमा की मुंह जुबानी।
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क्रिकेटर कमलेश की दादी को मिठाई खिलाती कमला नगरकोटी - फोटो : amar ujala
आस्ट्रेलिया को हराकर विश्वविजेता बनी भारतीय टीम को खुशी मनाते देख बिट्टू की दादी और उनके चाचा की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। यह बिट्टू कोई और नहीं अपना कमलेश नगरकोटी है, जिसने फाइनल में आस्ट्रेलिया के कप्तान समेत दो खिलाड़ियों को पवेलियन की राह दिखाकर भारत की जीत का मार्ग प्रशस्त किया।
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kamlesh nagarkoti
149 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले अपने इस लाल की कामयाबी पर घरवालों को उसका बजपन याद गया। कैसे वह घर के उबड़-खाबड़ आंगन में लकड़ी का बल्ला और कपड़े की गेंद से हर समय क्रिकेट खेलता रहता था और कई बार तो उसे डांट भी पड़ती थी।

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kamlesh
अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में तेज रफ्तार गेंदबाजी से बल्लेबाजों को पसीना छुड़ाने वाले कमलेश बागेश्वर के भरसीला गांव के रहने वाले हैं। राजस्थान की ओर से क्रिकेट खेलते हुए कमलेश ने अंडर-19 विश्वकप टीम में जगह बनाई और अपनी तेज गेंदबाजी और प्रदर्शन की बदौलत आईपीएल में भी उनकी बोली करोड़ों में छूटी और वह केकेआर टीम का हिस्सा बने।
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kamlesh
पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ से लेकर सचिन और द्रविड़ तक ने उनकी शान में ट्विटर पर कसीदे गढ़े। बीते वर्ष इंग्लैंड में आयोजित यूथ टेस्ट में भी उन्होंने एक मैच की दोनों पारियों में 10 विकेट चटकाए।
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शिवम मावी और कमलेश नागरकोटी - फोटो : File
इससे पहले विजय हजारे ट्रॉफी में हैट्रिक भी लगा चुके हैं। उनकी कामयाबी की कहानी जानने के लिए अमर उजाला संवाददाता शनिवार सुबह उनके घर पहुंचे। घर पर कई लोगों के साथ 87 वर्षीय आमा भी बैठी थीं। वह बार-बार अपने बेटे पूरन सिंह नगरकोटी से एक ही बात पूछ रही थी ‘टीवी पर कब देखेलो मेरा बिट्टू’ (मेरा बिट्टू टीपी पर कब नजर आएगा)। पूछने पर पता चला कि यह आमा कमलेश की दादी हैं।
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कमलेश नागरकोटि - फोटो : Amar Ujala
कमलेश ने जैसे ही गेंदबाज ईशान की गेंद पर एडवर्ड का कैच पकड़ा तो पूरा कमरा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस दौरान कमलेश के बारे में बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो साड़ी के आंचल से बार-बार अपने खुशी के आंसू पोंछती दादी रमुली देवी को उसका बचपन याद आ गया।

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फाइल फोटो
दादी ने बताया कि बिट्टू कभी-कभी घर के भीतर क्रिकेट खेलने लग जाता था। इससे लकड़ी के ऊपर बिछाई गई मिट्टी के फर्श में गड्ढे हो जाते थे। इसके लिए अक्सर वह उसे डांट भी लगाया करतीं थीं।

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कमलेश नागरकोटि - फोटो : Amar Ujala
कमलेश के चाचा पूरन सिंह नगरकोटी ने बताया कि पहले बिट्टू हर साल गांव आता था। जब तक वह गांव में रहता हर समय कपड़े की गेंद से क्रिकेट खेलता रहता था। आंगन की पिच पर चाचा पूरन भी उसकी गेंदों का सामना कर चुके हैं।

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कमलेश नागरकोटि - फोटो : Amar Ujala

इस बीच भारतीय टीम के 217 के लक्ष्य छूते ही घर पर मौजूद लोगों के साथ पूरा गांव खुशी से झूम उठा। घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया और मिठाई खाने और खिलाने का सिलसिला शुरू हो गया।

 
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कमलेश नागरकोटि - फोटो : Amar Ujala
कमलेश की दादी रमुली देवी अपने छोटे बेटे पूरन सिंह नगरकोटी और बहू कमला नगरकोटी के साथ गांव में रहती हैं। शनिवार को जब भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर जीत हासिल की तो कई लोग बधाई देने उनके घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सभी से कहा कि मेरे पोते ने गांव का नाम रोशन कर दिया।
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