जिस आंगन से मां-बाप ने बेटियों की डोली उठने का सपना संजोया था। रविवार को उसी आंगन से बेटियों की अर्थी उठते देख बीरोंखाल ब्लॉक के बापता गांव में हरेक की आखें नम थीं। दोनों की असमय मौत से किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि उन मांओं को हिम्मत बंधाएं भी तो कैसे। दरअसल छात्रा अमीषा का शव घटना वाले दिन बरामद कर लिया गया था, लेकिन उसके पिता के विदेश में होने के कारण अंतिम संस्कार नहीं हो पाया था।