उत्तरकाशी बस हादसे में एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। अगर सरकार ने पहाड़ की सुविधाओं पर ध्यान दिया होता तो तीर्थयात्रियों की जान बच सकती थी।
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accident in gangotri
- फोटो : amarujala
हादसे के बाद कई लोगों की जान तो मौके पर ही चली गई, लेकिन जब तक रेस्क्यू टीम घायलों को अस्पताल ले गई तक तक कई यात्रियों ने दम तोड़ दिया।
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दरअसल, गंगोत्री से उत्तरकाशी के रूट पर कहीं भी खाई में उतरने के लिए रास्ता ही नहीं है। ऐसे में रेस्क्यू टीम को तीर्थयात्रियों को दूसरे रास्ते से ले जाना पड़ा। जिसके कारण उन्हें अधिक समय लगा।
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छह बजे प्रशासन की टीम को सूचना मिली, लेकिन रेस्क्यू टीम को दुर्घटनाग्रस्त बस तक पहुंचते-पहुंचते करीब पौने घंटे लग गए। सबसे पहले टीम ने रस्सी के सहारे भागीरथी नदी के एक छोर से कुछ बचाव दल कर्मी नदी के दूसरे छोर तक पहुंचे।
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रस्सी के सहारे नदी पार करने में काफी वक्त लगा। जिससे रस्सी के एक-एक कर ही लोगों को बचाया जा सकता था। ऐसे में जब तक नदी पार की गई यात्री ने दम तोड़ दिया।