अगर आपको वैवाहिक जीवन में परेशानियां हैं तो इस मंदिर में आकर आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। यहां हवन कुंड की राख आपकी सारी परेशानियां दूर कर देंगी।
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त्रिर्युगी नारायण
कहा जाता है कि भारत में मौजूद इस मंदिर में यह ज्वाला तीन युगों से जल रही है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में जल रही अग्नि को साक्षी मानकर भगवान शिव और पार्वती ने विवाह किया था और तब से यह अग्नि इस मंदिर में प्रज्जवलित हो रही है।
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त्रियुगी नारायण मंदिर
त्रियुगी नारायण मंदिर में मौजूद अखंड धुनी के चारों ओर भगवान शिव ने पार्वती के संग फेरे लिए थे। आज भी इस कुंड में अग्नि को जीवित है। मंदिर में प्रसाद रूप में लकड़ियां भी चढ़ाई जाती है। श्रद्धालु इस पवित्र अग्नि कुंड की राख अपने घर ले जाते हैं। कहते हैं यह राख वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी परेशानियों को दूर करती है।
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triyugi narayan temple
मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हुआ था। रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद त्रियुगी नारायण मंदिर में शिव पार्वती का विवाह हुआ था।
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lord shiva and parvati
इस गांव में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का एक मंदिर है, जिसे शिव पार्वती के विवाह स्थल के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर के परिसर में ऐसे कई चीजें आज भी मौजूद हैं, जिनका संबंध शिव-पार्वती के विवाह से माना जाता हैं।
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shiv parvati marriage in triyugi narayan
कहा जाता है कि भगवान शिव और पार्वती विवाह जहां हुआ था वह अब भी मंदिर में मौजूद है। ब्रह्मा जी ने भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह करवाया था।
शिव पार्वती के विवाह में ब्रह्माजी पुरोहित बने थे। विवाह में शामिल होने पहले ब्रह्माजी ने जिस कुंड में स्नान किया था वह ब्रह्मकुंड यहीं है। तीर्थयात्री इस कुंड में स्नान करके ब्रह्माजी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।