फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच पर्वों का महापुण्यकाल आज, बढ़ गया महत्व, जानिए कौन-कौन से हैं ये विचित्र संयोग

Sat, 13 Apr 2019 12:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
1 of 6
पांच पर्वों का महापुण्य काल आज है। पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्रों की मिलन बेला में भगवान राम का जन्मोत्सव दोपहर 12 बजे मनाया जाएगा। इसी दिन वासंतिक नवरात्र में अष्टमी की कन्याएं जीमेंगी और इसी दिन मां सिद्धिदात्रि की नवमी मनाई जाएगी।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
भगवान भास्कर का मेष राशि में प्रवेश भी इसी दिन होगा। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार सहित देश की पवित्र नदियों में बैसाखी स्नान करेंगे। धनतेरस से भैयादूज तक पांच दिन पर्व हर साल पड़ते हैं। लेकिन शनिवार 13 अप्रैल को यह विचित्र संयोग पड़ रहा है कि एक ही दिन पांच पर्व एकसाथ हैं।
विज्ञापन

3 of 6
प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल को फसल काटने का पर्व बैसाखी मनाई जाती है। पूर्व में इस दिन देश के लाखों किसान हरिद्वार के गंगा तट पहुंचकर डुबकी लगाते थे और गंगाजल ले जाकर अपनी फसलों पर छिड़कते थे। गेहूं पर पहली दरांती गंगा जल छिड़कने के बाद ही लगाई जाती थी।

4 of 6
शनिवार को दुर्गा अष्टमी का महापर्व पड़ रहा है। अष्टमी तिथि पूर्वाह्न 11.40 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि आ जाएगी। परिणामस्वरूप अष्टम महागौरी और नवम सिद्धिदात्रि के पर्व शनिवार को ही मनाए जाएंगे। नवरात्र पूजने वाले श्रद्धालु देवी भागवत के पाठों का समापन शनिवार को कर देंगे।
विज्ञापन

5 of 6
चूंकि रविवार 14 अप्रैल को नवमी तिथि सुबह 9.35 बजे तक है। इसलिए उस दिन राम का जन्मकाल नहीं मिलेगा। भगवान राम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था। यह काल भी शनिवार को ही पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
बैसाखी के दिन सूर्यदेव पवित्र मेष राशि में प्रवेश करते हैं। मेष संक्रांति का पर्व काल रविवार को मनाया जाएगा। इस प्रकार पांच पर्वों का समागम हो जाने से शनिवार का महत्व और बढ़ गया है। रविवार को नवमी तिथि सवेरे 9.35 बजे तक रहेगी और इसके बाद दशमी लग जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें