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भविष्यवाणीः तीन महीने बाद कुदरत बरपाएगी कहर

Mon, 01 May 2017 02:41 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरिद्वार
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ज्योतिष भविष्यवाणी पर यकीन करें तो अच्छी खबर नहीं है। तीन महीने बाद  कुदरत अपना कहर बरपाएगी। पढ़ें, क्या कहते हैं नक्षत्र...
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वर्तमान वर्ष में अनेक जगह भारी वर्षा के योग हैं। वायु प्रधान वर्ष होने के कारण हवा और भूकंप भी खासे असर दिखा सकते हैं। रोहिणी का वास समुद्र तट पर जब भी हुआ है तभी भारी वर्षा देश में हुई है। कुंओं, तालाबों और नदी नालों में पर्याप्त जल बना रहेगा।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य जब आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो भारी वर्षा होती है। संवत के राजा से भी वर्षा ऋतु का निर्धारण किया जाता है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्र के अनुसार ही सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश इस बार 21 जून को हो रहा है।

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- फोटो : ANI
इसके ठीक 20 दिन बाद 10 जुलाई से जोरदार वर्षा शुरू हो जाएगी। इसी समय सूर्य मिथुन लग्न में प्रवेश करेंगे जो वर्षा का लग्न माना गया है।
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flood
अत: कहीं बहुत अधिक वर्षा तो कहीं बाढ़ तथा कहीं आंधी तूफान के साथ वर्षा के योग बन रहे हैं। देश के कुछ भागों में अलबत्ता अल्प वर्षा का भी योग है। यह भारत दक्षिण भारत समुद्र तट से जुड़े हुए है।
 
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वर्ष मंगल के शासन में वायु प्रधान वर्ष बन गए है। सूर्य और मंगल दोनों ही ऊष्णता प्रदान करते हैं। परिणाम स्वरूप भूकंप भी आ सकते हैं। वर्तमान में वर्ष का नाम साधारण संवत है। यह संवत जब भी पड़ा है, अच्छी खासी वर्षा धरती पर होती आयी है।       मुख्यत: वर्षा का अनुमान इस नक्षत्र से लगाया जाता है जो मेष संक्रांति पर पड़ा हो।
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मेष
इस बार मेष संक्रांति विशाखा नक्षत्र में आयी। रोहिणी का वास समुद्र के बजाय समुद्र तट पर हो गया है। ऐसा होने से धरती पर वर्षा का संपूर्ण योग बन जाता है। 
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वृष राश‌ि
संयोग से इस बार वर्ष का निवास धोबी के घर है। जब धोबी के घर वर्ष रहा है तभी भारी वर्षा हुई है। संवत के राजा का वाहन भी वृष है। देश की मूल प्रवृत्ति वर्षा को पसंद करती है। इस वर्ष पर्वतीय क्षेत्रों में भी पूर्व से अधिक वर्षा होने जा रही है।
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