भगवान बदरी विशाल के धाम में कल-कल बहता यह झरना अपने आप में कई रहस्यों को समेटे है। मान्यता है कि यह झरना पापियों को नहीं भिगोता है।
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यह रहस्यमयी झरना वसुधारा बदरीनाथ धाम से आठ किलोमीटर की दूरी पर माणा मार्ग में पुराने स्वर्गारोहिणी यात्रा मार्ग पर स्थित है। यह झरना तकरीबन 400 फीट ऊंचाई से गिरता है। लेकिन यह आज तक रहस्य ही है कि इसका जल लोगों पर क्यों नहीं गिरता।
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इतनी ऊचाई से गिरने वाले इस झरने का पानी एकदम मोतियों की बौछारों की तरह लगता है। कहा जाता है कि यह अष्ट वसुओं की तपस्थली है। इस प्रपात का जल झरने के नीचे खड़े होने पर भी किसी लोगों पर नहीं गिरता।
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हैरानी की बात यह है कि जिनके ऊपर भी यह गिरता है तो कभी भी सीधे नहीं गिरता है, केवल बारीक फुहार के रूप में ही गिरता है। मान्यता है कि यदि इस प्रपात कि बूंदें आप पर गिरे तो आप पुण्यात्मा हैं वरना पापी।
कहते हैं यहाँ सहदेव ने प्राण त्यागे और अर्जुन ने अपना गांडीव। इस झरने के रास्ते में कई जड़ी बूटियों से भरे पौधे हैं। ऐसे में जिस पर इसकी बूंदे गिरे वह हमेशा के लिए निरोगी हो जाता है।
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है यह केवल मान्यता के आधार पर पेश किए गए हैं।)