प्रसिद्ध धाम यमुनोत्री के कपाट शनिवार को वैद्धिक मंत्रोचारण के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए बंद हो जायेंगे। कपाट बंद होने का दिन भैया दूज यहां धार्मिक महत्व से विशेष माना जाता है। भैया दूज के दिन मां यमुना से मिलने सूर्य पुत्र यमराज जो यमुना के भाई हैं और चचेरे भाई शनिदेव सहित गुरू भाई भगवान हनुमान मिलने आते हैं। यमुनोत्री धाम में आज के दिन स्नान व पूजा अर्चना करने मात्र से मां यमुना श्रद्धालु के जन्म जन्मातंर के सभी पाप व कष्टों को दूर कर देती है। साथ ही स्नान करने वाले को सूर्य लोक की प्राप्ति होती है।
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yamunotri dham
- फोटो : AmarUjala
बता दें कि मां यमुना के कपाट अक्षय तृतीय के दिन खुले थे और शनिवार को भैया दूज के दिन बंद हो रहे हैं। देश विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए और कपाट बंद होने के दिन स्थानीय श्रद्धालु व हजारों की संख्या में देशी विदेशी श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं। मन्यता के अनुसार यमुनोत्री धाम चार धामों में सबसे पहला दर्शनीय स्थल है। चारधाम यात्रा के तहत जो भी श्रद्धालु उत्तराखंड आता है वह यहीं से अपनी यात्रा की शुरूआत करता है।
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यमुनोत्री धाम
- फोटो : AmarUjala
कहते हैं कि कपाट बंद होने पर यमुनोत्री धाम में मां यमुना के पास यमराज, शनिदेव और हनुमान हमेशा भैयादूज पर्व पर मिलने आते है। आज के दिन जो भी श्रद्धालु यमुनोत्री धाम में आकर मां यमुना के दर्शन, पुजा अर्चना व स्नान करता है। उसको यम यातनाओ से मुक्ती मिलती है और वह शनिदेव की वक्रदृष्टि से निजात और भगवान हनुमान का विशेष आशीर्वाद मिलता है। वैसे भैया दूज पर्व पूरे देश में भव्यता से मनाया जाता है और भैयादूज त्यौहार की शुरूआत भी यम और यमुना भाई बहन से ही हुई है।
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yamraj
- फोटो : AmarUjala
इसमें हर भाई बहिन यही कामना करता है कि जिस तरह यमराज ने अपनी बहन यमुना को वरदान दिया हुआ है कि जो यमुना के जल स्नान करेगा उसको यम यातना नहीं झेलनी होगी। सभी बहिने अपने भाई से अपनी सुरक्षा के लिए मनोकामना मांगती है। कहते है कि भागवान शनिदेव यमुना के मायके खरसाली में विराजमान है तो यमुनोत्री धाम के ऊपर बंदर पूंछ की चोटी में आज भी भगवान हनुमान जी तपस्या कर रहे हैं। मान्यता है कि तप पुरूषो को कई बार तो हनुमान जी ने दर्शन भी दिए है। यमुनोत्री धाम में सूर्य कुंड जहां गर्म पानी हर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में चावल और आलू पकाकर अपने घर ले जाता है और हर श्रद्धालु को यहां पर दिव्य शिला के दर्शन भी होते हैं।
यहां पर महिला और पुरूषों के लिए दो स्नान कुंड भी है। यमुनोत्री धाम के जहां जानकीचट्टी तक मोटर रोड़ की सुविधा है वहीं जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक पांच किमी की दुर्गम खड़ी चढ़ाई चढ कर यात्रियों को यहां आना पड़ता है। पैदल यात्रा के दौरान थका हुआ यात्री इन कुंड में स्नान करता है तो उसकी सारी थकान मिट जाती है। शनिवार को मां यमुना की पूजा अर्चना के बाद भैया दूज के दिन कपाट शीतकाल के लिए छह माह के लिए बंद कर दिए जायेंगे। साथ ही मां यमुना की उत्सव डोली को दुल्हन की तरह सजा कर ढोल नगाड़ों व शंख ध्वनी के साथ खरसाली यानी खुशीमठ लाया जाता है। जहां शीकालीन यमुना मंदिर में मां यमुना की भोग मूर्ति को रखा जाता है और यहीं पर खरसाली में उनियाल जाति के तीर्थ पुरोहित पूजा अर्चना करते हैं।